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 गुमनामी में खो गये असली कर्म योद्धा  - मर्यादा भगवान राम की शोभायात्रा में अमर्यादित जनता ने शहर को पाट दिया झूठे दोने पत्तल, डिस्पोजल गिलास से

गुमनामी में खो गये असली कर्म योद्धा - मर्यादा भगवान राम की शोभायात्रा में अमर्यादित जनता ने शहर को पाट दिया झूठे दोने पत्तल, डिस्पोजल गिलास से


 राम के सच्चे सेवक सफाई कर्मियों ने कुछ घंटे में साफ किया शहर 

छतरपुर।मर्यादा, करुणा, प्रेम, सदाचार, सत्य के पूरे दर्शन का नाम ही पुरषोत्तम भगवान राम है। रामनवमी यानि भगवान विष्णु के सातवे अवतार भगवान राम का प्रकट उत्सव। पूरे देश इस दिन शोभा यात्रा निकाल ख़ुशी को प्रकट किया जाता है। छतरपुर शहर में भीं बड़ा आयोजन होता है और कई किमी शोभायात्रा निकलती है। जगह जगह  खाने पीने से स्वागत। शहर की सड़के भोग प्रसाद के रूप में वितरित होने वाली खाद्य सामग्री की झूठन, डिस्पोजल कटोरी गिलास से लोगो की मानसिक अस्वच्छता के दर्शन दिखा जाता है। तब भगवान राम के वह सच्चे सेवक इसकी सफाई करते दिखते है जो असली कर्म योद्धा होते भीं जलसे की भीड़ में गुमनाम है।
छतरपुर शहर जहाँ भगवान राम के जन्म उत्सव को मनाने की पुरानी परम्परा रही है। कुछ दशक पहले तक हाथ ठिलिया पर भगवान राम का चित्र, कुछ ढ़ोल वादक और उंगलियों में गिने जाने वाले भक्त ही इस समारोह का हिस्सा हुआ करते थे। इसमें कोई गुरेज नहीं कि जब से प्रेम और सद्भावना के प्रतीक भगवान राम के प्रकट उत्सव के दिन राजनीति का ताड़का लगा तब से रामनवमी के दिन को भीं बड़े स्तर पर कुछ अलग ढंग से मनाने की परम्परा शुरू हो गई। दर्जनों डीजे की कपकपाती आवाज़, कुछ हुड़दंग में भगवान राम की मर्यादा और दर्शन खोता हुआ दिखाई देता है। तरह तरह के प्रयोग में शोभायात्रा में शामिल लोगो के स्वागत का इंतज़ाम होना शुरू हुआ। होडम होड़ में हर दस कदम की दूरी पर खाने पीने की व्यवस्था होने लगी। दुःखद है कि लोग इसका गलत फायदा उठाने लगे। प्रसाद के रूप में मिलने वाली खाद्य सामग्री की झूठन सड़को पर। डिस्पोजल कटोरी, गिलास से पूरी सड़के पाट दी जाती है। कई लोग ख़ासकर महिलाये विभिन्न स्टालो पर मिले वाले हलुआ, सब्जी पूड़ी, खिचड़ी, पुलाव, नमकीन चने इत्यादि को थेलो में भरती नजर आती है। मकसद होता है कि एक प्रकार से लूट पाट कर यह सामग्री बटोर घर ले जाई जा सके।  जो भीं शोभा यात्रा आगे बढ़ अपने अंतिम मुकाम पर जाकर समाप्त होती है और पूरे शहर को गंदगी से पाट जाती है। तब वह सफाईकर्मी सक्रिय दिखाई देते है जो असली कर्मयोद्धा है। जिनके कंधो पर जिम्मेदारी होती है कई किलोमीटर में फैली गंदगी को साफ करने की।  छतरपुर नगरपालिका में पदस्थ स्वच्छता निरीक्षक नायक जी बताते है कि शोभायात्रा के बाद पूरे शहर की सफाई के लिये करीब 90 सफाईकर्मी थे और करीब 30 ट्रॉली कचरा एकत्रित किया गया।
सफाई कर्मी वह गुमनाम तबका है जिसकी मेहनत का कोई मोल नहीं है और ना ही उनकी मेहनत कि किसी की नजर में कोई क़ीमत है। जब कि यही असली प्रभु राम के सेवक है जो लोगो की अस्वच्छ मानसिकता को साफ करने का काम कर रहे है।

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