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क्या पत्नी मांग सकती है पति के आधार कार्ड की जानकारी, जानें हाईकोर्ट का फैसला

क्या पत्नी मांग सकती है पति के आधार कार्ड की जानकारी, जानें हाईकोर्ट का फैसला

 


आधार जानकारी: 25 फरवरी 2021 को UIDAI ने उनके आवेदन को खारिज कर दिया था और कहा था कि इसके लिए उच्च न्यायालय के आदेश समेत कई चीजों की जरूरत होगी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था। क्या पति या पत्नी को अपने साथी के AADHAR कार्ड की जानकारी हासिल करने का अधिकार है? हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट ने साफ कह दिया है कि शादी निजता के अधिकार पर असर नहीं डाल सकती है। दरअसल, कई दिनों से इस बात पर बहस चल रही थी कि क्या पति या पत्नी को अपने साथी के आधार कार्ड की जानकारी हासिल करने का अधिकार है? इस सवाल का जवाब हाईकोर्ट में एक याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान मिल गया। अदालत का कहना है कि पत्नी सिर्फ शादी का हवाला देकर अपने जीवनसाथी के आधार कार्ड की जानकारी एकतरफा हासिल नहीं कर सकती हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया हैकि पत्नी सिर्फ शादी के आधार पर पति की आधार की जानकारी एक तरफा हासिल नहीं कर सकती है। कोर्ट का कहना है कि शादी निजता के अधिकार पर असर नहीं डालती है।

क्या था मामला-

दरअसल, हुबली की एक महिला ने एक पारिवारिक अदालत का दरवाजा खटखटाकर पति से गुजारा भत्ता मांगा था। दोनों की शादी नवंबर 2005 में हुई थी और उनकी एक बेटी भी है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हुबली की एक महिला अलग हो चुके पति का आधार नंबर, एनरोलमेंट की जानकारी और फोन नंबर हासिल करना चाहती थी। उनका कहना था कि पति के ठिकानेकी जानकारी नहीं होने के चलतेवह उसके खिलाफ फैमिली कोर्ट की तरफ से मिले आदेश को लागू नहीं कर पा रही हैं। इसे लेकर वह UIDAI यानी यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पास भी गईं थीं।
25 फरवरी 2021 को UIDAI नेउनके आवेदन को खारिज कर दिया था और कहा था कि इसके लिए उच्च न्यायालय के आदेश समेत कई चीजों की जरूरत होगी। इसके बाद उन्होंनेहाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट में क्या हुआ डिवीजन बेंच नेभी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जिक्र किया था और कहा कि किसी भी जानकारी के खुलासे से पहले दूसरे व्यक्ति को भी अपनी बात रखनेका अधिकार है। बाद में मामला एकल बेंच के पास भेज दिया था। सिंगल बेंच ने 8 फरवरी 2023 को UIDAI को पति को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही RTI एक्ट के तहत महिला के आवेदन पर दोबारा विचार करने के लिए कहा।

शादी दो लोगों का रिश्ता-

डिविजन बेंच में जस्टिस एस सुनील दत्त यादव और विजयकुमार ए पाटिल सुनवाई कर रहे थे। बेंच नेकहा, ‘शादी दो लोगों का रिश्ता है, जो निजता के अधिकार पर असर नहीं डालता है। यह व्यक्ति का निजी अधिकार है।’ दोनों की शादी नवंबर 2005 मेंहुई थी और उनकी एक बेटी भी है। रिश्तेमेंपरेशानियां आनेके बाद पत्नी ने कानूनी कार्रवाई की शुरुआत की थीं। यहां फैमिली कोर्ट ने 10 हजार रुपये का गुजारा भत्ता और बेटी के लिए 5 हजार रुपये अलग से दिए जाने की बात कही गई।

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