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मेला जलविहार को लेकर पार्षद आमने-सामने, आरोप-प्रत्यारोपों से गरमाया माहौल

 

कोई जनता के हित में उठा रहा आवाज, तो कोई नगर पालिका और ठेकेदार के पक्ष में दे रहा सफाई; झूलों की टिकट, दुकानों के आवंटन और सुरक्षा व्यवस्था पर छिड़ी बहस।

छतरपुर। शहर में आयोजित मेला जलविहार अब मनोरंजन के साथ-साथ विवादों का केंद्र बनता जा रहा है। मेले की व्यवस्थाओं, दुकानों के आवंटन, झूलों की टिकट दरों और सुरक्षा इंतजामों को लेकर पार्षदों के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। एक ओर भाजपा के कुछ पार्षद प्रतिनिधि आम जनता की सुविधाओं और सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निर्दलीय पार्षद गट्टी यादव ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए नगर पालिका की व्यवस्थाओं का बचाव किया है।मामला अब केवल मेले की व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नगर पालिका के मेला प्रभारियों और झूला ठेकेदार की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। भाजपा पार्षद प्रतिनिधियों ने मेला प्रभारियों पर मनमानी और झूला ठेकेदार से कथित लेनदेन के आरोप लगाए हैं। वहीं इन आरोपों को निर्दलीय पार्षद ने सिरे से खारिज किया है। ऐसे में मेले की वास्तविक व्यवस्थाओं और आरोपों की सच्चाई को लेकर शहर में चर्चा तेज हो गई है।

भाजपा पार्षद प्रतिनिधियों ने उठाए सवाल, टिकट 50 रुपये करने की मांग:

भाजपा पार्षद प्रतिनिधि सुरेंद्र साहू और अजय कबीर ने मेला जलविहार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि नगर पालिका और मेला प्रभारी आम जनता की सुविधाओं के बजाय अपने हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनका आरोप है कि मेले में दुकानों के आवंटन में ब्लॉकिंग की गई है और झूला ठेकेदार की मनमानी के चलते आम नागरिकों को महंगी टिकट खरीदनी पड़ रही है।

दोनों पार्षद प्रतिनिधियों ने मांग की है कि मेले में सभी झूलों की टिकट दर अधिकतम 50 रुपये निर्धारित की जाए, ताकि आम परिवार भी अपने बच्चों के साथ मेले का आनंद उठा सकें। उनका कहना है कि जब नगर पालिका के मेला प्रभारी स्वयं मुफ्त में झूलों का आनंद लेते हैं, तो आम जनता पर मनमानी टिकट दरों का बोझ क्यों डाला जा रहा है?भाजपा पार्षद प्रतिनिधियों ने नगर पालिका पर पांच लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है।

मिक्सर ग्रेविटी झूले पर प्रतिबंध लगाने की मांग:

भाजपा पार्षद प्रतिनिधि अजय कबीर ने मेले में लगे मिक्सर ग्रेविटी झूले की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस प्रकार के झूले से अलग-अलग स्थानों पर हादसे होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में मेला जलविहार में इस झूले पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए, जिससे किसी भी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके।वहीं सुरेंद्र साहू ने नगर पालिका के जारी आदेश का हवाला देते हुए कहा कि आदेश के क्रमांक 14 में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि मेले में लगाए जाने वाले दो झूलों के बीच कम से कम 10 फीट की दूरी होनी चाहिए। इसके बावजूद यदि निर्धारित दूरी का पालन नहीं हो रहा है तो नगर पालिका को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सभी झूलों के बीच 10 फीट की दूरी सुनिश्चित कराई जाए, ताकि मेले में आने वाले लोगों की सुरक्षा से खिलवाड़ न हो।

निर्दलीय पार्षद गट्टी यादव ने आरोपों को बताया निराधार:

दूसरी ओर निर्दलीय पार्षद गट्टी यादव ने भाजपा पार्षद प्रतिनिधियों द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। दुकानों के आवंटन को लेकर उन्होंने कहा कि मेले में सभी दुकानदारों को नियमानुसार दुकानें दी गई हैं। किसी की दुकान ब्लॉक नहीं की गई है और सभी को दुकान उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।

झूलों की बढ़ती टिकट दरों पर उन्होंने ठेकेदार का पक्ष रखते हुए कहा कि झूलों का टेंडर लगभग 45 लाख रुपये में लिया गया है। ऐसे में ठेकेदार नगर पालिका को इतनी बड़ी राशि जमा करने के बाद अपना खर्च कहां से निकालेगा? उन्होंने कहा कि महंगाई के इस दौर में टिकट दरों का बढ़ना स्वाभाविक है। छोटे झूलों की टिकट भी 30 से 50 रुपये के बीच है। पहले के समय और वर्तमान परिस्थितियों में अंतर है, इसलिए टिकट दरों को लेकर भी वास्तविकता समझना जरूरी है।

सुरक्षा व्यवस्था के पर्याप्त इंतजाम होने का दावा:

मेले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गट्टी यादव ने कहा कि नगर पालिका द्वारा सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। मेले में कैमरे लगाए गए हैं और अन्य व्यवस्थाएं भी की गई हैं। उन्होंने नगर पालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों का बचाव करते हुए कहा कि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी पक्षपात नहीं कर रहा है। नगर पालिका की ओर से व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। यदि कुछ लोगों को कोई परेशानी है तो उसके संबंध में वह कुछ नहीं कहना चाहते।

अब सवालों के घेरे में नगर पालिका की व्यवस्था:

मेला जलविहार को लेकर पार्षद प्रतिनिधियों के अलग-अलग बयान सामने आने के बाद अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या दुकानों के आवंटन में पूरी पारदर्शिता बरती गई है? क्या झूलों की टिकट दरें आम जनता की पहुंच में हैं? क्या नगर पालिका के आदेश के मुताबिक झूलों के बीच 10 फीट की दूरी रखी गई है? क्या सुरक्षा के सभी इंतजाम वास्तव में मौके पर मौजूद हैं?इन सवालों का जवाब केवल आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि मौके पर निष्पक्ष जांच और व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आने से ही मिल सकेगा। फिलहाल मेला जलविहार में मनोरंजन से ज्यादा व्यवस्थाओं और जिम्मेदारों की जवाबदेही को लेकर चर्चा हो रही है। अब देखना होगा कि नगर पालिका इन सवालों पर क्या कदम उठाती है।

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