बकस्वाहा में ओवरलोड डंपरों की आवाजाही से सड़कें बदहाल, धूल प्रदूषण से लोग परेशान; आखिर जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब?
शोभित शाह | बकस्वाहा संवाददाता
नगर की बदहाल सड़कें और क्रेशर से उड़ती धूल अब लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही हैं। गिट्टी से लदे भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं, वहीं उड़ती धूल ने स्थानीय नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। समस्या से परेशान नगरवासियों ने अब प्रशासन के खिलाफ आंदोलन का रास्ता अपनाने की चेतावनी दी है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और छतरपुर कलेक्टर के नाम ज्ञापन तहसीलदार त्रिलोक सिंह पोषाम को सौंपकर एक सप्ताह के भीतर समस्या के समाधान की मांग की गई। मांगें पूरी नहीं होने पर लोगों ने भूख हड़ताल शुरू करने का अल्टीमेटम दिया है।
क्रेशर से निकलने वाली गिट्टी, लेकिन नुकसान नगर की सड़कों को!
ज्ञापन के अनुसार, ग्राम मादपुर के पास संचालित क्रेशर से सड़क निर्माण के लिए गिट्टी का परिवहन दिन-रात किया जा रहा है। नगरवासियों ने आरोप लगाया कि गिट्टी से लदे डंपर कथित तौर पर 50 टन तक वजन लेकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। भारी वाहनों की इस आवाजाही से बकस्वाहा नगर की सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं और जगह-जगह गड्ढे बनने से आवागमन प्रभावित हो रहा है।
सवाल यह है कि यदि भारी वाहनों के कारण सड़कें खराब हो रही हैं, तो उनकी निगरानी और मरम्मत की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या संबंधित विभागों ने वाहनों के वजन और सड़क को हो रहे नुकसान की जांच की है? यदि जांच हुई है, तो उसकी कार्रवाई सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
धूल से बेहाल नागरिक, जिम्मेदार विभागों की निगरानी पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क से गुजरने वाले भारी वाहनों के कारण लगातार धूल उड़ती है, जिससे आसपास रहने वाले नागरिकों और राहगीरों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। धूल प्रदूषण पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
नगरवासियों ने सड़क पर नियमित पानी का छिड़काव कराने, ओवरलोड वाहनों पर रोक लगाने और निर्धारित वजन सीमा के अनुसार ही गिट्टी परिवहन सुनिश्चित कराने की मांग की है। इसके बावजूद यदि समस्या बनी रहती है, तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बस स्टैंड से सागर रोड तक सड़क की मरम्मत की मांग
ज्ञापन में बस स्टैंड से सागर रोड तक लगभग एक किलोमीटर लंबी सड़क की मरम्मत कराने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। नागरिकों ने मांग की है कि सड़क को हुए नुकसान की जांच कराई जाए और यदि जांच में क्रेशर संचालक या परिवहनकर्ताओं की जिम्मेदारी सामने आती है, तो नियमानुसार उनसे मरम्मत की लागत वसूलने की कार्रवाई की जाए। साथ ही धूल पर नियंत्रण के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं।
एक सप्ताह का अल्टीमेटम, फिर भूख हड़ताल
नगरवासियों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर समस्या के समाधान की दिशा में ठोस काम शुरू नहीं हुआ, तो वे भूख हड़ताल करने के लिए मजबूर होंगे। ज्ञापन तहसीलदार त्रिलोक सिंह पोषाम को सौंपा गया, जिन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल: क्या प्रशासन एक सप्ताह के भीतर बदहाल सड़क, कथित ओवरलोड परिवहन और धूल प्रदूषण की समस्या पर ठोस कार्रवाई करेगा, या फिर नगरवासियों को अपनी मांगें मनवाने के लिए भूख हड़ताल का सहारा लेना पड़ेगा? फिलहाल लोगों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है।

