|मातगुवां पुलिस की कार्रवाई से खुला कथित नकली खाद कारोबार; जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यवाही के दौरान दूरी चर्चा में, निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की उठी मांग|
छतरपुर। जिले में किसानों के नाम पर खाद के कारोबार में कथित गड़बड़ी का गंभीर मामला सामने आया है। मातगुवां पुलिस ने छतरपुर शहर के नारायणपुर रोड स्थित अमर मंडपम परिसर में कार्रवाई करते हुए नकली डीएपी खाद का बड़ा जखीरा बरामद किया है। इस कार्रवाई के बाद कृषि विभाग की निगरानी व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े होने लगे हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस की कार्रवाई में कथित नकली डीएपी खाद का भंडार सामने आने के बाद इस कारोबार के संचालन, आपूर्ति और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच जरूरी हो गई है। आदित्य पाठक और अनुराग शर्मा के नाम इस मामले में सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, कारोबार में उनकी भूमिका और आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
कृषि विभाग की भूमिका पर सवाल, निष्पक्ष जांच जरूरी
इस मामले में कृषि विभाग के सहायक उपसंचालक रवीश सिंह और आत्मा परियोजना के प्रभारी सुरेश पटेल की कथित भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि विभागीय स्तर पर प्रभावी निगरानी नहीं होने के कारण शहर के भीतर नकली खाद का कारोबार संचालित होता रहा। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में उनका पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शहर के भीतर इतने बड़े पैमाने पर कथित नकली डीएपी खाद का भंडारण किया जा रहा था, तो कृषि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली? क्या खाद की गुणवत्ता, भंडारण और बिक्री की नियमित जांच की जा रही थी, या निगरानी व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित रह गई थी?
कार्रवाई के दौरान अधिकारियों की दूरी क्यों?
कार्रवाई के दौरान कृषि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कथित अनुपस्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। नकली खाद का मामला सीधे किसानों की आर्थिक स्थिति और कृषि उत्पादन से जुड़ा है। ऐसे गंभीर प्रकरण में कृषि विभाग की सक्रिय भागीदारी, खाद के नमूनों की जांच और बरामद सामग्री की गुणवत्ता का वैज्ञानिक परीक्षण बेहद जरूरी है।
यदि विभाग को पहले से कोई जानकारी थी, तो उसकी जांच होनी चाहिए। यदि जानकारी नहीं थी, तो निगरानी व्यवस्था में हुई चूक की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
कॉल डिटेल की जांच से सामने आ सकता है सच?
मामले में निष्पक्ष जांच के तहत संबंधित व्यक्तियों के बीच संपर्क, खाद की खरीद-फरोख्त, भंडारण और वितरण से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि जांच एजेंसी को आवश्यक और वैधानिक आधार मिलता है, तो संबंधित कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच से संपर्कों और घटनाक्रम की पड़ताल की जा सकती है। हालांकि, केवल फोन पर संपर्क होना किसी की संलिप्तता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
किसानों के साथ धोखा हुआ तो जिम्मेदार कौन?
नकली डीएपी खाद किसानों की फसल, लागत और उत्पादन पर प्रतिकूल असर डाल सकती है। ऐसे में यह मामला केवल अवैध कारोबार तक सीमित नहीं, बल्कि किसानों के हितों की सुरक्षा से भी जुड़ा है। बरामद खाद के नमूनों की प्रयोगशाला जांच, भंडार के स्रोत, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और कथित कारोबार से जुड़े सभी लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अब सवाल पुलिस और प्रशासन से है: क्या इस मामले की जांच केवल खाद के जखीरे तक सीमित रहेगी, या इसके पीछे की पूरी सप्लाई चेन, वित्तीय लेनदेन और संभावित विभागीय लापरवाही की भी पड़ताल होगी? यदि किसी स्तर पर मिलीभगत या कर्तव्य में लापरवाही प्रमाणित होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल, मामले में आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। किसानों को न्याय दिलाने के लिए जरूरी है कि कार्रवाई निष्पक्ष हो, किसी दोषी को संरक्षण न मिले और किसी निर्दोष को बिना प्रमाण दोषी न ठहराया जाए।

