रिक्शा चालक से कथित मारपीट और धमकी देने का मामला गरमाया, अपनी ही सरकार में मंत्री को कोतवाली के बाहर बैठना पड़ा धरने पर; पुलिस अधिकारियों के सामने उठे जवाबदेही के सवाल
अनवर रजा रानू "राघव भास्कर बाँदा"
बांदा। जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर उस समय सवाल खड़े हो गए, जब रिक्शा चालक के साथ कथित मारपीट और धमकी देने के मामले में जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद को खुद कोतवाली पहुंचकर धरने पर बैठना पड़ा। दो दरोगाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और उन्हें बर्खास्त करने की मांग को लेकर मंत्री ने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ मोर्चा खोल दिया। घटना ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है।
जानकारी के अनुसार, एक रिक्शा चालक दबंगों द्वारा कथित तौर पर अवैध रुपये मांगने की शिकायत लेकर पुलिस चौकी पहुंचा था। पीड़ित का आरोप है कि वहां चौकी इंचार्ज ने उसकी शिकायत सुनने के बजाय उसके साथ मारपीट की और उसे प्रताड़ित किया। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि जब वह न्याय की गुहार लेकर कोतवाली पहुंचा, तो वहां दूसरे दरोगा ने भी कथित रूप से धमकी देकर उसे भगा दिया।
न्याय की गुहार लेकर पहुंचे पीड़ित की शिकायत पर उठा विवाद
रिक्शा चालक के आरोपों की जानकारी मिलने के बाद जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद कोतवाली पहुंचे। मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए मंत्री कोतवाली के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने दोनों दरोगाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और उन्हें बर्खास्त करने की मांग उठाई।
मंत्री के धरने पर बैठने से पुलिस में हड़कंप मच गया। सीओ सिटी सौरभ सिंह समेत अन्य पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और मंत्री को समझाने तथा मामले को सुलझाने की कोशिश में जुट गए।
अपनी ही सरकार में मंत्री का धरना, पुलिस की जवाबदेही पर सवाल
इस घटनाक्रम ने पुलिस की शिकायत निस्तारण व्यवस्था और आम नागरिकों के साथ व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि पीड़ित के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला पुलिस की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है। वहीं, शिकायत पर निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
फिलहाल, दोनों दरोगाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर कोतवाली के बाहर धरना जारी होने की जानकारी सामने आई है। मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष, आरोपों की जांच की स्थिति और संबंधित अधिकारियों पर की गई कार्रवाई की पुष्टि होना बाकी है।
अब सवाल यह है कि रिक्शा चालक के आरोपों की निष्पक्ष जांच कब होगी और यदि पुलिसकर्मी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी? आम नागरिक को न्याय के लिए मंत्री के धरने तक पहुंचना पड़े, तो शिकायत व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

