लवकुशनगर में सरकारी धन खर्च होने के बावजूद यातायात व्यवस्था जस की तस, पुराने बस स्टैंड पर जाम से जनता परेशान; नवीन बस स्टैंड के संचालन पर जिम्मेदारों की चुप्पी
By गौरव गोस्वामी "राघव भास्कर छतरपुर"
लवकुशनगर। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार नवीन बस स्टैंड आखिर किस काम आ रहा है? दो साल पहले उद्घाटन के दौरान जिस बस स्टैंड से नगर की यातायात व्यवस्था सुधरने और पुराने बस स्टैंड पर लगने वाले जाम से मुक्ति मिलने की उम्मीद जताई गई थी, वह उम्मीद अब तक पूरी होती नजर नहीं आ रही है। नवीन बस स्टैंड बनने के बावजूद बसों का पुराने बस स्टैंड पर खड़े होना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
उद्घाटन हुआ, लेकिन व्यवस्था नहीं बदली!
करीब दो वर्ष पहले क्षेत्रीय विधायक द्वारा नवीन बस स्टैंड का उद्घाटन किया गया था। उस समय दावा था कि नए बस स्टैंड के संचालन से नगर में यातायात सुचारु होगा और पुराने बस स्टैंड के आसपास लगने वाले जाम से आम लोगों को राहत मिलेगी। लेकिन मौजूदा स्थिति इन उम्मीदों पर सवाल खड़े कर रही है।
एक तरफ करोड़ों रुपये की लागत से तैयार नवीन बस स्टैंड मौजूद है, तो दूसरी तरफ पुराने बस स्टैंड पर बसों के खड़े होने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब नए बस स्टैंड का निर्माण इसी समस्या के समाधान के लिए किया गया था, तो फिर उसका प्रभावी उपयोग सुनिश्चित क्यों नहीं हो पा रहा है?
सरकारी धन खर्च, फिर भी जनता को राहत नहीं!
नवीन बस स्टैंड का पूरा उपयोग नहीं होने के पीछे वास्तविक कारण क्या है? क्या वहां जरूरी सुविधाओं का अभाव है, क्या बस संचालकों को निर्धारित स्थान पर बसें खड़ी करने के निर्देश नहीं दिए गए हैं, या फिर संबंधित विभागों के बीच समन्वय की कमी है? इन सवालों का जवाब जिम्मेदार अधिकारियों को देना चाहिए।
यदि बसों का संचालन और पार्किंग पुराने बस स्टैंड से ही जारी रहना है, तो नवीन बस स्टैंड के निर्माण से मिलने वाले लाभ आखिर जनता तक कैसे पहुंचेंगे? सरकारी धन से तैयार सुविधाओं का उपयोग सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
पुराने बस स्टैंड पर जाम, आखिर जिम्मेदार कौन?
पुराने बस स्टैंड के आसपास बसों की आवाजाही और उनके खड़े होने से जाम की स्थिति बनने पर आम नागरिकों, दुकानदारों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके बावजूद यदि नवीन बस स्टैंड को प्रभावी रूप से संचालित नहीं किया जा रहा है, तो यातायात व्यवस्था सुधारने के प्रयासों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब जवाबदेही तय करेगा प्रशासन?
दो साल बीतने के बाद भी नवीन बस स्टैंड का समुचित उपयोग शुरू नहीं होना प्रशासनिक निगरानी और संचालन व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत बताता है। संबंधित विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि बसों का नियमित संचालन नए बस स्टैंड से कब शुरू होगा और पुराने बस स्टैंड पर लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है—करोड़ों रुपये खर्च कर बस स्टैंड तो बना दिया गया, लेकिन जब बसें वहीं पुरानी जगह खड़ी हो रही हैं, तो जनता को राहत कब मिलेगी? अब नगरवासियों को आश्वासनों की नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई और जवाबदेही की जरूरत है।

