मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान शिविर की तस्वीर ने खड़े किए सवाल, जब अधिकारी ही मोबाइल में उलझे हों तो जनता के भरोसे का क्या होगा?
छतरपुर। मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान का उद्देश्य आम जनता की समस्याओं को सुनना और उनका त्वरित निराकरण करना है, लेकिन छतरपुर जिले के महेबा में आयोजित शिविर की सामने आई एक तस्वीर प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है।
तस्वीर में कलेक्टर मृणाल मीना फरियादियों की समस्याएं सुनते नजर आ रहे हैं, वहीं पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा आवेदनों का अवलोकन करते दिखाई दे रहे हैं। दूसरी ओर, जनपद पंचायत के सीईओ अजय सिंह मोबाइल चलाते नजर आ रहे हैं। इसी तस्वीर ने शिविर में अधिकारियों की सक्रियता और जनसमस्याओं के प्रति गंभीरता को लेकर बहस छेड़ दी है।
एक तरफ जनता की फरियाद, दूसरी तरफ मोबाइल में व्यस्तता!
मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जब जिले के वरिष्ठ अधिकारी जनता की शिकायतें सुनने और आवेदनों की समीक्षा करने में जुटे हों, तब अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से भी सक्रिय भागीदारी की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में जनपद CEO की मोबाइल चलाते हुए सामने आई तस्वीर लोगों के मन में सवाल पैदा कर रही है कि क्या शिविर में सभी अधिकारी समान गंभीरता से जनसमस्याओं पर ध्यान दे रहे थे?
हालांकि, केवल एक तस्वीर के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि अधिकारी पूरे समय मोबाइल में व्यस्त थे या उन्होंने अपने दायित्वों की अनदेखी की। मोबाइल के इस्तेमाल का कारण भी स्पष्ट नहीं है। फिर भी, सार्वजनिक जनसुनवाई के दौरान सामने आई ऐसी तस्वीर प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाने के लिए पर्याप्त है।
अब सवाल यह है कि क्या इस तस्वीर पर जिम्मेदार अधिकारी संज्ञान लेंगे? मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान की सफलता केवल शिविर आयोजित करने से नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनने, आवेदनों पर कार्रवाई करने और समय-सीमा में समाधान सुनिश्चित करने से तय होगी। महेबा शिविर की इस तस्वीर के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित अधिकारी जनसमस्याओं के निराकरण को लेकर कितने गंभीर हैं।


