बकस्वाहा। तहसील कार्यालय में चल रहे भ्रष्टाचार और घूसखोरी के खेल पर सागर लोकायुक्त पुलिस ने बड़ा प्रहार किया है। जमीन के नामांतरण के एवज में रिश्वत की मांग कर रहे तहसील के बाबू को लोकायुक्त की विशेष ट्रैप टीम ने 15,000 रुपये की नकद घूस लेते हुए रंगे हाथों रंगे हाथों धर दबोचा। लोकायुक्त की इस अचानक दबिश से पूरे तहसील परिसर में अफरा-तफरी और हड़कंप मच गया; कई कर्मचारी कार्रवाई के डर से अपने दफ्तर छोड़ इधर-उधर खिसकते नजर आए।
लोकायुक्त से मिली जानकारी के अनुसार, रिश्वतखोरी का यह मामला जमीन नामांतरण से जुड़ा हुआ है। फरियादी कृष्णकांत बिलथरे ने जमीन के वैध नामांतरण के लिए तहसील कार्यालय में आवेदन किया था। आरोप है कि बाबू राजेंद्र श्रीवास्तव ने फाइल आगे बढ़ाने और आदेश जारी कराने के बदले कुल 25,000 रुपये रिश्वत की मांग की थी। बाबू पहले ही 10,000 रुपये फरियादी से ऐंठ चुका था। बाकी बची 15,000 रुपये की दूसरी किस्त देने के लिए बाबू लगातार दबाव बना रहा था। परेशान होकर पीड़ित ने इसकी विधिवत शिकायत सागर लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक से कर दी। शिकायत के प्राथमिक सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से फरियादी को केमिकल लगे नोट देकर तहसील भेजा। जैसे ही कृष्णकांत ने तय रकम बाबू राजेंद्र श्रीवास्तव के हाथ में थमाई, पहले से घेराबंदी कर बैठी लोकायुक्त टीम ने मौके पर छापा मारकर उसे दबोच लिया। हाथ धुलवाते ही बाबू के हाथ गुलाबी हो गए। लोकायुक्त टीम ने आरोपी बाबू के कब्जे से रिश्वत की पूरी 15,000 रुपये की राशि बरामद कर ली है। साथ ही नामांतरण से संबंधित मूल फाइल और दस्तावेज भी साक्ष्य के तौर पर जब्त कर लिए गए हैं। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर विस्तृत पूछताछ और कागजी कार्रवाई की जा रही है। इस सफल ट्रैप कार्रवाई को अंजाम देने वाली सागर लोकायुक्त टीम में मुख्य रूप से निरीक्षक मंजू किरन तिर्की एवं निरीक्षक रंजीत सिंह, प्रधान आरक्षक अजय क्षेत्री, रफीक खान, आरक्षक संतोष गोस्वामी, आदेश तिवारी, विक्रम सिंह, गोल्डी, प्रदीप और नीतेश सहित अन्य तकनीकी व मैदानी सदस्य शामिल रहे।

