नौगवां के करीब 450 वर्ष पुराने शीतलदास अखाड़ा कबीर आश्रम का मामला, महापंचायत में प्रशासन को एक माह का समय
बांदा। नरैनी तहसील क्षेत्र के नौगवां स्थित करीब 450 वर्ष पुराने शीतलदास अखाड़ा कबीर आश्रम की भूमि और संपत्ति को लेकर विवाद सामने आया है। कबीर पंथी समाज ने आश्रम की जमीन पर कथित अवैध कब्जे और संपत्ति को अलग-अलग नामों पर दर्ज कराए जाने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
20 सितंबर को आयोजित कबीर पंथी समाज की महापंचायत में इस मुद्दे पर चर्चा की गई। समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर आश्रम की संपत्ति से कथित अवैध कब्जा हटाने, आश्रम की संपत्तियों की जांच कराने तथा किसी कबीर पंथी संत को महंत नियुक्त किए जाने की मांग की।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि आश्रम के नाम दर्ज बड़ी मात्रा में भूमि को अलग-अलग नामों पर दर्ज करा दिया गया है। समाज के मुताबिक, पूर्व में आश्रम के पास काफी भूमि थी, लेकिन वर्तमान में आश्रम के नाम करीब 100 बीघा भूमि ही शेष रह गई है। समाज ने भूमि अभिलेखों की जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
कबीर पंथी समाज ने रविकंकर पुत्र राजेंद्र द्विवेदी निवासी मोहिनी, सतना (मध्य प्रदेश) पर आश्रम की चल-अचल संपत्ति पर कब्जे के प्रयास का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। समाज का कहना है कि आश्रम की ऐतिहासिक और धार्मिक संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
महापंचायत में निर्णय लिया गया कि प्रशासन को मांगों पर कार्रवाई के लिए एक माह का समय दिया जाएगा। यदि निर्धारित अवधि में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो कबीर पंथी समाज द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर महापंचायत आयोजित कर आंदोलन की रणनीति तय करने की चेतावनी दी गई है।
समाज ने मुख्यमंत्री से जिला प्रशासन को मामले की जांच कराकर आश्रम की भूमि एवं संपत्ति से संबंधित अभिलेखों की जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है।

