छतरपुर। नगर पालिका सीमा के विस्तार के साथ शहर के नए क्षेत्रों में आबादी लगातार बढ़ रही है। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोग नगर पालिका को नियमित रूप से टैक्स भी जमा कर रहे हैं, लेकिन कई इलाकों में आज भी सड़क, नाली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसा ही मामला देरी रोड स्थित महर्षि स्कूल के सामने की कॉलोनी का सामने आया है, जहां स्थानीय लोगों के मुताबिक करीब 200 से 250 परिवार निवास करते हैं।रहवासियों का कहना है कि कॉलोनी में पक्की सड़क और नाली का निर्माण नहीं होने से रोजाना आवागमन में परेशानी होती है। बारिश के दौरान कच्चा रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार राहगीर फिसलकर गिर भी चुके हैं। बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाने के दौरान भी रास्ते की खराब स्थिति परेशानी का कारण बनती है और एंबुलेंस के कॉलोनी के अंदर पहुंचने में दिक्कत होने का दावा रहवासियों ने किया है।रहवासियों ने आरोप लगाया कि कॉलोनी में पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर के ड्रीम प्रोजेक्ट से संबंधित निर्माण कार्य कराया गया था, लेकिन सड़क का निर्माण सीमित हिस्से तक ही दिखाई देता है। उनका कहना है कि जहां तक अधिकारियों और कर्मचारियों के वाहन आसानी से पहुंच सकते हैं, वहां तक सड़क बनी है, जबकि आगे बड़ी आबादी रहने के बावजूद सड़क और नाली की सुविधा नहीं है।
स्थानीय लोगों के अनुसार कॉलोनी में पानी की पाइपलाइन समेत अन्य सुविधाओं की भी कमी है। उनका कहना है कि जब क्षेत्र नगर पालिका सीमा में शामिल है और रहवासी टैक्स का भुगतान कर रहे हैं तो उन्हें सड़क, नाली, पानी और अन्य नागरिक सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।मामले में कॉलोनाइजर और प्लॉटिंग को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। रहवासियों का कहना है कि शहर के आसपास कई स्थानों पर प्लॉटिंग के बाद कॉलोनी तो विकसित हो जाती है, लेकिन सड़क, नाली और पानी जैसी सुविधाओं की जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं रहती। हालांकि कॉलोनी के वैध या अवैध होने तथा आवश्यक अनुमतियां लिए जाने संबंधी आरोपों की पुष्टि संबंधित विभागों की जांच और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।रहवासियों ने नगर पालिका प्रशासन से मौके का निरीक्षण कराकर पक्की सड़क और नाली का निर्माण कराने तथा पानी की पाइपलाइन सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। अब देखना यह है कि नगर पालिका प्रशासन 200 से 250 परिवारों की इस आबादी की समस्या का समाधान कब तक करता है।

