छतरपुर। हनुमान जयंती पर शहर के जानराय टौरिया में ऐसा अलौकिक दृश्य साकार हुआ, जिसने पूरे शहर को भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। 51 फीट ऊंची भव्य अष्टधातु हनुमान प्रतिमा का अनावरण और प्रतिमा के नीचे स्थापित पंचमुखी हनुमान जी की पाषाण प्रतिमा की विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा हुई। इस दिव्य क्षण के साक्षी कामदगिरि पीठाधीश्वर रामस्वरूप आचार्य, कथावाचक पं. धीरेंद्र शास्त्री सहित देशभर से पधारे संत, महात्मा और शास्त्रों के ज्ञाता विद्वान बने । संतों की अमृतमयी वाणी से पूरा परिसर गूंज उठा, जहां धर्म, आस्था और संस्कारों की त्रिवेणी देखने को मिली।
संतों ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह केवल प्रतिमा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति का सजीव प्रतीक है। 51 फीट ऊंची यह अष्टधातु प्रतिमा अब छतरपुर की पहचान बनेगी, जो देश ही नहीं बल्कि विश्व स्तर पर श्रद्धा का केंद्र बनेगी। पंचमुखी हनुमान स्वरूप की स्थापना को शक्ति, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का अद्भुत संगम बताया गया। विद्वानों ने वेद, पुराण और रामकथा के प्रसंगों के माध्यम से लोगों को धर्म, संयम, सेवा और त्याग का संदेश दिया। इस दौरान श्रद्धालु मंत्रोच्चार और भक्ति में डूबे नजर आए।नागा साधुओं का रोमांचक शस्त्र प्रदर्शननिर्मोही अखाड़ा के नागा साधुओं ने अपने पारंपरिक शस्त्र कौशल का ऐसा अद्भुत प्रदर्शन किया, जिसने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। तलवार, भाला और अन्य शस्त्रों के साथ संतुलन और साधना का अद्वितीय संगम देखने को मिला। नागा साधुओं के इस प्रदर्शन आमजनमानस का दिल जीत लिया।
सेवा और समर्पण का हुआ सम्मान
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने वाले समाज के विभिन्न वर्गों, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों को मंच से जगतगुरु द्वारा सम्मानित किया गया। श्रृंगारी महाराज ने सभी संतों, अतिथियों और श्रद्धालुओं के प्रति आभार प्रकट किया।
भंडारे में दिखी भक्तों की आस्था-
प्राण प्रतिष्ठा के बाद भगवान को भोग अर्पित कर भंडारे का शुभारंभ हुआ। मंदिर परिसर में संतों ने ऊपर प्रसाद ग्रहण किया, वहीं नीचे हजारों श्रद्धालुओं ने अनुशासित कतारों में प्रसाद पाया। छतरपुर के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात और राजस्थान से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इस आयोजन की भव्यता का प्रमाण बनी।


