चंडीगढ़।हरियाणा पुलिस में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई जाएगी। पुलिस महानिदेशक (DGP) ओपी सिंह ने रिश्वतखोर पुलिसकर्मियों को लेकर बड़ा और कड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जो भी पुलिसकर्मी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा जाएगा, उसके खिलाफ किसी तरह की विभागीय जांच की आवश्यकता नहीं होगी और उसे सीधे नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा।
डीजीपी ओपी सिंह ने यह बात सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने आधिकारिक संदेश में कही। उन्होंने लिखा कि “ठग और बदमाश, चाहे वे पुलिस में हों या समाज में, उनके लिए विभाग की नीति बिल्कुल साफ है—कानून को जवाब देना होगा।”
सभी एसपी-सीपी को सख्त निर्देश
डीजीपी ने बताया कि उन्होंने राज्य के सभी पुलिस अधीक्षकों (SP) और पुलिस आयुक्तों (CP) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जो भी कर्मी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जाएं, उनके मामलों में जांच बैठाने की औपचारिकता में न उलझा जाए। ऐसे मामलों में संविधान के अनुच्छेद 311(2) के तहत मिली असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए तत्काल बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाए।
पिछले दो महीनों में हुई कार्रवाई
ओपी सिंह ने यह भी बताया कि बीते दो महीनों में जिन पुलिसकर्मियों को रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है, उनके साथ इसी नीति के तहत कार्रवाई की गई है और उन्हें सेवा से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने साफ किया कि भविष्य में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
भ्रष्टाचार पर ‘नो समझौता’
डीजीपी ने अपने संदेश के अंत में लिखा—“जैसी करनी, वैसी भरनी।” उनका यह बयान साफ तौर पर यह संकेत देता है कि हरियाणा पुलिस अब अपने ही तंत्र में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर रुख अपनाने जा रही है।
आम जनता को मिला सख्त संदेश
इस फैसले को पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न सिर्फ पुलिसकर्मियों को कड़ा संदेश गया है, बल्कि आम जनता में भी यह भरोसा बढ़ा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में अब त्वरित और निर्णायक कार्रवाई होगी।
हरियाणा पुलिस का यह रुख आने वाले समय में पूरे पुलिस तंत्र में अनुशासन और ईमानदारी को मजबूत करने की दिशा में अहम साबित हो सकता है।

