
छतरपुर। बीते रोज पर्यटन नगरी के गौतम होटल एंड रिसॉर्ट के करीब एक दर्जन कर्मचारी फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गए थे, जिन्हें पहले स्थानीय अस्पताल और इसके बाद क्रमश: छतरपुर तथा ग्वालियर रेफर किया गया था। मंगलवार की सुबह इन बीमार कर्मचारियों में से 3 कर्मचारियों की मौत हो गई, जिसमें बाद खजुराहो में कोहराम की स्थिति बन गई। चूंकि कैबिनेट बैठक के लिए आए मुख्यमंत्री भी इस समय खजुराहो में थे इसलिए जिला प्रशासन और पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभालकर लोगों को शांत कराने का प्रयास किया लेकिन लोग नहीं माने और सीएम के खजुराहो से रवाना होने तक लगातार हंगामा करते रहे। इस दौरान न तो मुख्यमंत्री परिजनों से मिलने पहुंचे और न अन्य कोई मंत्री-विधायक, जिसके बाद लोगों ने इसे सरकार की संवेदनहीनता कहा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार को खजुराहो के गौतम होटल एंड रिसॉर्ट में काम करने वाले कर्मचारी रवि कोंदर, दयाराम रैकवार, रामस्वरूप कुशवाहा, हार्दिक सोनी, बिहारी पटेल, गिरजा रजक, प्रागीलाल कुशवाहा, दयाराम कुशवाहा, गोविंद कुशवाहा, राजकुमारी और रोशनी की अचानक तबियत बिगडऩे पर उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चूंकि सभी कर्मचारियों की हालत खराब थी, इसलिए उन्हें तुरंत जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया था। जिला अस्पताल में इलाज के बाद जब कुछ कर्मचारियों की हालत ठीक नहीं हुई तो चिकित्सकों ने ग्वालियर रेफर किया, जहां मंगलवार की सुबह प्रागीलाल कुशवाहा, गिरजा रजक और रामस्वरूप कुशवाहा ने दम तोड़ दिया, जिसकी पुष्टी सीएमएचओ डॉ. आरपी गुप्ता ने की। वहां जैसे ही कर्मचारियों की मौत की खबर खजुराहो पहुंची वैसे ही लोगों में आक्रोश फैल गया। नाराज भीड़ सड़क पर उतरकर हंगामा करने लगी। सबसे पहले मृतकों के परिजन और कुछ अन्य लोगों ने राजनगर में चक्काजाम किया। किसी तरह जिला प्रशासन और पुलिस ने उन्हें शांत कराकर हटाया लेकिन लोग नहीं माने इसके बाद भीड़ खजुराहो की पुरानी बस्ती के पास पहुंचकर हंगामा करने लगी। इस दौरान खजुराहो नगर परिषद की पूर्व अध्यक्ष कविता राजे और समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष कपूर सिंह यादव सहित पार्टी के कार्यकर्ता, मृतकों के परिजन और कुशवाहा समाज के पदाधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि आधा दर्जन कर्मचारियों की मौत हो गई लेकिन मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों की उपस्थिति के कारण सही जानकारी नहीं दी जा रही है। नाराज भीड़ हंगामा करते-करते चंदेला चौराहा तक पहुंच गई थी, जहां करीब 4 घंटे तक हंगामा चला। इस दौरान कई प्रशासनिक अधिकारियों से प्रदर्शनाकरियों की तीखी नोंक-झोंक हुई। प्रदर्शनकारी मृतक के परिजनों के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी की मांग कर रहे थे। चूंकि मुख्यमंत्री मोहन यादव को इसी रूट से गुजरना था इसलिए लोगों की नाराजगी के मद्देनजर सीएम को रूट बदलकर उन्हें खजुराहो एयरपोर्ट ले जाया गया। मुख्यमंत्री के जाने के बाद प्रदर्शनाकारी बमुश्किल शांत हुए। एडीएम मिलिंद नागदेवे एवं एएसपी आदित्य पटले का कहना था कि स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने होटल पहुँचकर भोजन के सैंपल ले लिए हैं, जांच जारी है। जैसे ही सही जानकारी सामने आएगी, जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी।
जिला प्रशासन ने शोकाकुल परिवारों को दी त्वरित सहायता
वहीं दूसरी ओर फूड प्वाइजनिंग से हुई तीन कर्मचारियों की मौत के मामले को तत्काल संज्ञान लेते हुए कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने परिजनों को तुरंत सहायता राशि स्वीकृत की। रेडक्रॉस सोसायटी से 20-20 हजार रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता और अंत्येष्टि के लिए 5-5 हजार रुपये की तत्काल सहायता राशि दी गई। इसके अलावा संबल योजना तहत 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि की स्वीकृति की प्रक्रिया भी शुरु की गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार को खजुराहो के गौतम होटल एंड रिसॉर्ट में काम करने वाले कर्मचारी रवि कोंदर, दयाराम रैकवार, रामस्वरूप कुशवाहा, हार्दिक सोनी, बिहारी पटेल, गिरजा रजक, प्रागीलाल कुशवाहा, दयाराम कुशवाहा, गोविंद कुशवाहा, राजकुमारी और रोशनी की अचानक तबियत बिगडऩे पर उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चूंकि सभी कर्मचारियों की हालत खराब थी, इसलिए उन्हें तुरंत जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया था। जिला अस्पताल में इलाज के बाद जब कुछ कर्मचारियों की हालत ठीक नहीं हुई तो चिकित्सकों ने ग्वालियर रेफर किया, जहां मंगलवार की सुबह प्रागीलाल कुशवाहा, गिरजा रजक और रामस्वरूप कुशवाहा ने दम तोड़ दिया, जिसकी पुष्टी सीएमएचओ डॉ. आरपी गुप्ता ने की। वहां जैसे ही कर्मचारियों की मौत की खबर खजुराहो पहुंची वैसे ही लोगों में आक्रोश फैल गया। नाराज भीड़ सड़क पर उतरकर हंगामा करने लगी। सबसे पहले मृतकों के परिजन और कुछ अन्य लोगों ने राजनगर में चक्काजाम किया। किसी तरह जिला प्रशासन और पुलिस ने उन्हें शांत कराकर हटाया लेकिन लोग नहीं माने इसके बाद भीड़ खजुराहो की पुरानी बस्ती के पास पहुंचकर हंगामा करने लगी। इस दौरान खजुराहो नगर परिषद की पूर्व अध्यक्ष कविता राजे और समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष कपूर सिंह यादव सहित पार्टी के कार्यकर्ता, मृतकों के परिजन और कुशवाहा समाज के पदाधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि आधा दर्जन कर्मचारियों की मौत हो गई लेकिन मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों की उपस्थिति के कारण सही जानकारी नहीं दी जा रही है। नाराज भीड़ हंगामा करते-करते चंदेला चौराहा तक पहुंच गई थी, जहां करीब 4 घंटे तक हंगामा चला। इस दौरान कई प्रशासनिक अधिकारियों से प्रदर्शनाकरियों की तीखी नोंक-झोंक हुई। प्रदर्शनकारी मृतक के परिजनों के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी की मांग कर रहे थे। चूंकि मुख्यमंत्री मोहन यादव को इसी रूट से गुजरना था इसलिए लोगों की नाराजगी के मद्देनजर सीएम को रूट बदलकर उन्हें खजुराहो एयरपोर्ट ले जाया गया। मुख्यमंत्री के जाने के बाद प्रदर्शनाकारी बमुश्किल शांत हुए। एडीएम मिलिंद नागदेवे एवं एएसपी आदित्य पटले का कहना था कि स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने होटल पहुँचकर भोजन के सैंपल ले लिए हैं, जांच जारी है। जैसे ही सही जानकारी सामने आएगी, जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी।
जिला प्रशासन ने शोकाकुल परिवारों को दी त्वरित सहायता
वहीं दूसरी ओर फूड प्वाइजनिंग से हुई तीन कर्मचारियों की मौत के मामले को तत्काल संज्ञान लेते हुए कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने परिजनों को तुरंत सहायता राशि स्वीकृत की। रेडक्रॉस सोसायटी से 20-20 हजार रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता और अंत्येष्टि के लिए 5-5 हजार रुपये की तत्काल सहायता राशि दी गई। इसके अलावा संबल योजना तहत 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि की स्वीकृति की प्रक्रिया भी शुरु की गई।
