बकस्वाहा में किसानों के लिए चल रही भावांतर योजना अचानक ठप पड़ गई है, जिससे क्षेत्रभर के किसान भारी संकट में हैं। प्रदेश सरकार ने सोयाबीन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय कर खरीदी की घोषणा की थी, लेकिन बकस्वाहा मंडी में व्यवस्था संभाल रहे एकमात्र कर्मचारी—सहायक उपनिरीक्षक परसादी अहिरवार का 4 दिसंबर को छतरपुर तबादला हो गया। उनके जाने के बाद मंडी पूरी तरह बंद हो गई और खरीदी रुक गई।
स्थिति यह है कि किसान रोजाना मंडी पहुंचते हैं, लेकिन वहां कोई अधिकारी-कर्मचारी मौजूद नहीं मिलता। लाला सिंह लोधी, निरपाल लोधी, सुरेश तिवारी, उमेश बिल्थरे और जगत सिंह लोधी सहित कई किसानों ने कहा कि सरकार भावांतर योजना का लाभ देने की बात करती है, लेकिन यहां मंडी में ताला लगा है। किसानों को शाहगढ़ और दमोह तक अपनी उपज लेकर जाने की मजबूरी हो रही है, जिससे आर्थिक बोझ और समय दोनों की बर्बादी हो रही है।भावांतर योजना में मंडी रेट एमएसपी से कम होने पर अंतर की राशि सीधे किसानों को मिलती है, लेकिन मंडी बंद होने से पूरा सिस्टम ठप हो गया है। तहसीलदार भरत पांडे ने बताया कि मंडी सचिव के अनुसार कर्मचारी उपलब्ध न होने से काम रुका है। कर्मचारी आते ही भावांतर योजना पुन: शुरू की जाएगी।

