रातों-रात प्रकट होने का दावा कर चमत्कार मान रहे ग्रामीण
छतरपुर। जिले की राजनगर जनपद के कदारी गांव में रातों-रात प्रकट होने वाला कुआं आस्था का केंद्र बन गया है। स्थानीय लोग इसे दैवीय चमत्कार मानकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं और कुएं के पानी को गंगाजल की तरह बोतलों में भरकर घर ले जा रहे हैं। लोग इस पानी से रोग-निवारण का दावा भी कर रहे हैं। पास में स्थित प्राचीन विंध्यवासिनी माता मंदिर के कारण भी इस स्थान का महत्व बढ़ गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर कदारी गांव में हनुमत विश्वकर्मा के खेत में पिछले दिनों हुई एक अनोखी घटना ने सभी को चौंका दिया था। ग्रामीणों ने दावा किया था कि जिस खेत में पहले से एक कुआं मौजूद था, उसके बगल में रातोंरात एक नया कुआं प्रकट हुआ है। हनुमत विश्वकर्मा ने बताया कि सुबह जब वे खेत पर पहुंचे, तो वहां एक बड़ा कुआं दिखाई दिया, जबकि रात तक वहां कुछ नहीं था। हैरानी की बात यह है कि खेत में रखा पानी से भरा नीला ड्रम भी गायब मिला। ग्रामीण इस कुएं को चित्रकूट के भरतकूप की तरह दैवीय शक्ति से प्रकट हुआ मान रहे हैं। कुएं की ईंटें 200 से 300 साल पुरानी बताई जा रही हैं, जिसके चलते लोग इसे ऐतिहासिक और पौराणिक मान रहे हैं। हालांकि, इस कुएं की वैज्ञानिक जांच अभी तक नहीं हुई है और न ही पुरातत्व विभाग ने इसकी पुष्टि की है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं की वैज्ञानिक जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
बड़ी संख्या में कुंए के दर्शन करने पहुंच रहे लोग इसे दैवीय चमत्कार मान रहे हैं ओर इसके पानी को बोतलों में भरकर घर ले जा रहे हैं। लोग दावा कर रहे हैं कि कुंए के पानी से रोग-निवारण हो रहा है। कुंए के पास स्थित प्राचीन विंध्यवासिनी माता मंदिर के कारण भी इस स्थान के प्रति लोगों की आस्था बढ़ गई है। इतना ही नहीं कुंए के आसपास दुकानें सज गई हैं, जहां से लोग भोग-प्रसाद खरीदकर कुंए के किनारे चढ़ा रहे हैं और पूजा-अर्चना कर रहे हैं।बोतलों में पानी भरकर ले जा रहे लोग

