छतरपुर। राजनगर जनपद की ग्राम पंचायत चौबर के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक पर कुछ समय पहले भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। जांच के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर तीनों के विरुद्ध राजनगर थाना म भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। उक्त तीनों ने मिलकर कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हुए शासकीय योजनाओं में 48 लाख 38 हजार 188 रुपये का घोटाला किया है।
क्या है मामला...?
प्राप्त जानकारी के अनुसार फरवरी 2025 में चौबर निवासी साहिब सिंह, कल्याण सिंह, जीवन सिंह, दंगल सिंह, देवसिंह आदि ग्रामीणों ने कलेक्टर की जनसुनवाई में शिकायत करते हुए बताया था कि पिछले दो कार्यकाल से गांव की सरपंच श्रीमती प्रेमकुंवर सिंह हैं और उनका पूरा कामकाज उनके अर्जुन सिंह उर्फ गिन्नी राजा संभालते हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि अर्जुन सिंह ने अपने नौकर साथीराम पुत्र बहादुर सिंह का फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र बनवाकर मतदाता सूची में नाम जोड़ा और इसके बाद अन्य कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उसे गांव का निवासी बताते हुए प्रधानमंत्री आवास जैसी अनेक शासकीय योजनाओं का अनैतिक लाभ दिया। ग्रामीणों के मुताबिक साथीराम गांव का रहने वाला नहीं है, वह दिखने में नेपाल का रहने वाला प्रतीत होता है। वह लंबे समय से सरपंच के घर में बतौर नौकर काम करते आ रहा है। शासकीय योजनाओं का लाभ देने के अलावा सचिव प्रकाशचंद्र पटेल ने साथीराम के नाम से एक फर्जी फर्म बनाकर मजदूरी, सरिया, गिट्टी, सीमेंट, रेत, पत्थर, सेटरिंग आदि के नाम पर 40 लाख से अधिक का भुगतान भी किया। जो भी शासकीय राशि उक्त व्यक्ति के नाम पर मिली उसका सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक ने बंदरबांट कर लिया। ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों को संज्ञान में लेकर कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने जांच के निर्देश दिए थे और जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद जिला पंचायत सीईओ के पत्र क्रमांक 3476 के परिपालन में शुक्रवार को राजनगर पुलिस ने चौबर पंचायत की सरपंच श्रीमती प्रेमकुंवर सिंह, सचिव प्रकाशचंद्र पटेल और रोजगार सहायक ओमप्रकाश दुबे के खिलाफ अपराध क्रमांक 376, धारा 318(4) और 316(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया।

