छतरपुर। करीब 4 माह पहले मातगुंवा थाना क्षेत्र में सामने आए लव जिहाद, धर्म परिवर्तन, दुष्कर्म और मारपीट के चर्चित मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। दरअसल मामले की पीडि़ता युवती ने एक बार फिर मीडिया के सामने आकर चौंकाने वाला बयान दिया है। उसका कहना है कि उसने अपने भाई और दोस्तों के दबाव में आकर झूठी एफआईआर दर्ज कराई थी। युवती के इस बयान के बाद उसका साथ देने वाले हिन्दू संगठनों में भी नाराजगी है और अब उनके द्वारा युवती पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।बोली- अपने भाई के दबाव में आकर दर्ज कराई थी झूठी एफआईआर
यह है मामला
युवती ने बताया कि नाबालिग अवस्था में उसके माता-पिता ने उसकी शादी दमोह निवासी कुलदीप जैन से कर दी थी, जिससे उसके दो बच्चे हैं। वैवाहिक विवाद के चलते तलाक का मामला कोर्ट में चल रहा था। इसी दौरान अपने भाई की शादी में उसकी मुलाकात मातगुवां निवासी समीर खान से हुई, दोनों में प्रेम संबंध बने और उन्होंने कोर्ट मैरिज कर ली। युवती ने बताया कि चूंकि उसका भाई, मां और दोस्त उसके फैसले से सहमत नहीं थे और लगातार उस पर दबाव बना रहे थे, जिसमें चलते 1 मई 2025 को उसने मातगुवां थाना में समीर के विरुद्ध झूठी एफआईआर दर्ज करवा दी थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर समीर को जेल भी भेज दिया था, जबकि समीर ने न तो उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया, न मांस खिलाया, न ही कलमा पढ़वाया।
हिन्दू संगठनों ने जताई नाराजगी
वहीं युवती के इस बयान के बाद हिन्दू संगठनों ने उस पर नाराजगी जाहिर की है। भगवा ब्रिगेड के संगठन प्रमुख प्रशांत महतों ने कहा कि जब युवती उनके पास आई थी, तब उसकी मानसिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह सही-गलत का फैसला कर पाती। संगठन ने ही युवती के परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर उसकी मदद की थी और एफआईआर दर्ज करवाई थी लेकिन अब, युवती अपने बयान बदल रही है और कह रही है कि उस पर परिवार का दबाव था। प्रशांत महतों का कहना है कि ऐसा नहीं है। उस समय लड़की अपनी मर्जी से बयान दे रही थी और उन्हीं बयानों के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी। उन्हें संदेह है कि शायद लड़की को जान से मारने की धमकी देकर या किसी अन्य तरीके से मानसिक दबाव डालकर बयान बदलने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले की गंभीरता से जांच करने की अपील की है।
इनका कहना
1 मई 2025 को युवती की शिकायत पर मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 और बीएनएस की धारा 64(2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच पूरी होने के बाद आरोपी समीर खान को जेल भेजा गया था, जो चार महीने बाद रिहा हुआ। युवती के नए बयान के बाद मामले की जांच नए सिरे से की जा सकती है।
अंकुर चौबे, थाना प्रभारी, मातगुवां

