छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय एक बार फिर सुर्खियों में है। पहले भगवान राम-सीता पर आपत्तिजनक बयान, फिर भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद अब एक नया मामला सामने आया है, जो सीधे छात्रों के करियर से जुड़ा है।विश्वविद्यालय में बढ़ी बीएससी एजी की सीटें, लेकिन संसाधनों का अभाव
सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय ने बीएससी एग्रीकल्चर (बीएससी, एजी) कोर्स में सीटें तो बढ़ा दी हैं, लेकिन संसाधनों का भारी अभाव है। 2025-26 सत्र के लिए 240 सीटें बढ़ाई गई हैं, लेकिन न तो पर्याप्त शिक्षक हैं, न ही लैब, क्लासरूम, लाइब्रेरी, कंप्यूटर, हर्बल गार्डन जैसी बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं। ऐसे में छात्रों को अपने भविष्य को लेकर चिंता सताने लगी है।
जिम्मेदारों की लापरवाही - छात्र परेशान
विश्वविद्यालय प्रशासन के इस रवैये को लेकर छात्रों में नाराजगी है। उनका कहना है कि बढ़ी हुई सीटों के बाद भी विश्वविद्यालय संसाधन जुटाने में विफल रहा है। वहीं, जब इस मामले में विभागाध्यक्ष पी.एल. प्रजापति से बात की गई तो उन्होंने कहा हमारे पास पर्याप्त संसाधन हैं, जो नहीं हैं, उन्हें उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है।
कुलगुरु के खिलाफ पहले भी हो चुका है हंगामा
महाराजा छत्रसाल विश्वविद्यालय विवादों से पहले भी घिरा रहा है। हाल ही में एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने रिजल्ट में अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन किया था। आरोप था कि सैकड़ों छात्रों को इतिहास और अंग्रेजी जैसे विषयों में शून्य अंक दिए गए और उपस्थित छात्रों को अनुपस्थित दिखाया गया। इसके अलावा, कुलगुरु शुभा तिवारी के भगवान राम-सीता पर टिप्पणी को लेकर भी विवाद हुआ था, जिसकी जांच अभी जारी है।
अनियमितताओं की जांच रिपोर्ट सौपी गई
विश्वविद्यालय में अनियमितताओं, सहायक प्राध्यापकों की भर्ती और बिना टेंडर के खरीदी सहित 12 बिंदुओं पर जांच के लिए सागर कमिश्नर के निर्देश पर टीम बनाई गई थी। इस टीम ने अपनी रिपोर्ट छतरपुर कलेक्टर को सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक, अधिकतर शिकायतें सही पाई गई हैं।
कलेक्टर का बयान
कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने बताया—जांच रिपोर्ट प्राप्त हो गई है और उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। कई बिंदुओं पर जांच की गई थी। अब आगे की कार्रवाई की जाएगी।

