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छतरपुर की रहस्यमयी धरोहर: सड़वा की गुफा

छतरपुर। जिले के बड़ामलहरा क्षेत्र में घने जंगलों और पथरीली पहाडिय़ों के बीच बसी सड़वा की गुफा अपने रहस्यमयी सौंदर्य और धार्मिक महत्व के लिए जानी जाती है। स्थानीय लोग इसे स्वर्ग का द्वार भी कहते हैं, क्योंकि यह गुफा बाहर से छोटी दिखने के बावजूद अंदर से इतनी विशाल है कि हजारों लोग एक साथ इसमें समा सकते हैं।

गुफा के भीतर मां पीतांबरा का मंदिर और एक विशाल शिवलिंग विराजमान हैं, जो इसे श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बनाते हैं। गुफा की छत से टपकता पानी और प्राकृतिक ठंडक इसे और भी रहस्यमय बनाती है, मानो यह प्रकृति और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम हो। गुफा में मां पीतांबरा और शिवलिंग की मौजूदगी इसे धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है। हर साल सावन और शिवरात्रि के मौके पर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। स्थानीय लोग बताते हैं कि गुफा में दर्शन मात्र से मन को शांति मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पर्यटन की दृष्टि से भी यह गुफा छतरपुर जिले के लिए एक अनमोल रत्न है। खजुराहो, रानेह जलप्रपात और कुटनी बांध जैसे विश्व प्रसिद्ध स्थलों के बीच सड़वा की गुफा अपनी रहस्यमयी संरचना और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखती है।

रहस्य और आध्यात्मिकता
पिछले 24 वर्षों से गुफा में रह रहे स्वामी राजेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि, सड़वा की गुफा की कहानी सदियों पुरानी है। मान्यता के अनुसार, इस गुफा में साधु-संतों ने वर्षों तक तपस्या की और सिद्धियां प्राप्त कीं। गुफा के भीतर एक संकरी सुरंग, जिसे स्वर्ग का रास्ता कहा जाता है, आज भी लोगों के लिए कौतूहल और भय का विषय है। इस रास्ते की गहराई और इसका गंतव्य अब तक रहस्य बना हुआ है, और आम लोग इसमें प्रवेश करने से हिचकते हैं। गुफा की दीवारों से टपकता पानी शिवलिंग पर प्राकृतिक अभिषेक करता है, जो इसे शिव भक्तों के लिए विशेष बनाता है। गर्मियों में भी गुफा की ठंडक और ऑक्सीजन स्तर आगंतुकों को आश्चर्यचकित करता है।

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