छतरपुर। शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र अपोलो क्रॉस में आम रास्ते पर अवैध दुकान निर्माण का सनसनीखेज मामला सामने आया है। स्थानीय व्यवसायी शरद अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) नियमों और अपर कलेक्टर के आदेश की खुलेआम अवहेलना करते हुए आम रास्ते पर दुकान बनाकर उसे करोड़ों रुपये में बेचने की योजना बनाई। इस मामले में शिकायतकर्ता अजय अग्रवाल ने तत्परता दिखाते हुए चोरी-छुपे डाले जा रहे लेंटर के निर्माण कार्य को रुकवाकर मामले को उजागर किया। इस घटना ने शहर में हड़कंप मचा दिया है और स्थानीय लोगों में शरद अग्रवाल की कार्यप्रणाली को लेकर गहरी नाराजगी देखी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, शरद अग्रवाल ने कुछ समय पहले अजय अग्रवाल को अपोलो क्रॉस में एक दुकान बेची थी। इस दुकान की रजिस्ट्री में साफ तौर पर एक आम रास्ते का उल्लेख था, जो सभी दुकानदारों और स्थानीय लोगों के लिए आवागमन का प्रमुख मार्ग है। रेरा नियमों के तहत, इस तरह के आम रास्ते पर कोई निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्धारित होता है। इसके बावजूद, शरद अग्रवाल ने कथित तौर पर इस रास्ते पर अवैध रूप से दुकान का निर्माण शुरू कर दिया, जिसे बाद में करोड़ों रुपये में बेचने की योजना थी। स्थानीय लोगों और दुकानदारों का कहना है कि शरद अग्रवाल की यह हरकत न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि अपोलो क्रॉस जैसे व्यस्त क्षेत्र में यातायात और आवागमन को भी बाधित कर रही है। इस निर्माण से आसपास की दुकानों का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है और पैदल यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कलेक्टर का स्थगन आदेश और उसकी अवहेलना
अजय अग्रवाल ने जब इस अवैध निर्माण की शिकायत जिला प्रशासन से की, तो अपर कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्माण कार्य पर स्थगन आदेश जारी किया लेकिन शरद अग्रवाल ने इस आदेश को ठेंगा दिखाते हुए चोरी-छुपे रात के समय लेंटर डालने का काम शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि शरद अग्रवाल ने यह काम जानबूझकर गुपचुप तरीके से किया ताकि प्रशासन और शिकायतकर्ताओं की नजरों से बचा जा सके। अजय अग्रवाल को जब इसकी भनक लगी, तो उन्होंने तुरंत मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवाया। अजय ने बताया कि शरद अग्रवाल की इस हरकत से न केवल उनकी दुकान की पहुंच प्रभावित हो रही है, बल्कि पूरे क्षेत्र की यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, "शरद अग्रवाल ने पहले रजिस्ट्री में आम रास्ते का जिक्र किया और अब उसी रास्ते पर दुकान बनाकर करोड़ों की कमाई करना चाहते हैं। यह सरासर धोखाधड़ी और नियमों का उल्लंघन है।
रेरा नियमों का खुला उल्लंघन
रेरा (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) के नियमों के अनुसार, किसी भी कॉलोनी या व्यावसायिक परिसर में आम रास्ते, पार्किंग या अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए निर्धारित क्षेत्र पर निर्माण कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित है। शरद अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने इन नियमों की अनदेखी करते हुए न केवल अवैध निर्माण शुरू किया, बल्कि कलेक्टर के स्थगन आदेश को भी नजरअंदाज किया। यह मामला रेरा प्राधिकरण के लिए भी एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि इस तरह की गतिविधियां न केवल खरीदारों के साथ धोखा हैं, बल्कि शहर की नियोजित विकास योजना को भी नुकसान पहुंचाती हैं। बहरहाल यह मामला अब प्रशासन और रेरा प्राधिकरण के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। यदि शरद अग्रवाल के खिलाफ त्वरित कार्रवाई नहीं की गई, तो यह अन्य बिल्डरों को भी नियम तोड़ने के लिए प्रेरित कर सकता है। जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि अवैध निर्माण को ध्वस्त करें और रेरा नियमों का पालन सुनिश्चित करें। इस मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई पर शहर की नजरें टिकी हैं।