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 स्टेनों विहीन जिला मुख्यालय का कलेक्ट्रेट कार्यालय

स्टेनों विहीन जिला मुख्यालय का कलेक्ट्रेट कार्यालय


नियम विरूद्ध तरीके से लगभग दस बारह साल से कलेक्ट्रेट में अटैच मछली विभाग का स्टेनों, विधानसभा प्रश्र की जानकारी अधर में लटकी


छतरपुर। पूरे जिले की कमान जिला प्रशासन के हाथों में रहती है। किस प्रकार से जिले का संचालन करना है यह काम जिलाधीश का होता है। प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाना होता है। साथ ही जिले की व्यवस्थाओं और जनता की समस्या का समाधान करना होता है। लेकिन जब जिलाधीश अपने ही विभाग की समस्या को दूर नहीं कर पा रहे है तो जिले की समस्याओं को कैसे दूर कर सकते है। इसका सीधा साधा उदाहरण सुनने को तब मिलता है जब विधानसभा सत्र के दौरान एक विधायक द्वारा मुख्यमंत्री से प्रदेश के अधिकारी और कर्मचारियों की नियुक्त की जानकारी मांगी। 

जब पता चलता है कि छतरपुर जिला प्रशासन के पास स्टेनो का पद तो है लेकिन शासन के द्वारा आज दिनांक तक वहां स्टेनों पदस्थ नहीं किया है। जिले के मछली विभाग में पदस्थ स्टेनो प्रेम सिंह को जिलाधीश ने अपने कलेक्ट्रेट के स्टेनों के लिए उन्हें लगभग दस बारह साल से अटैच कर रखा है। जबकि  शासन के नियमानुसार किसी भी अधिकारी कर्मचारी का तीन वर्ष से अधिक अटैच कर नहीं रखा जा सकता है। इसी वजह से विधानसभा सत्र के दौरान चाही गई जानकारी अभी तक भोपाल मुख्यालय नहीं पहुंची है। इतने जिलाधीश आये और गए लेकिन किसी ने भी स्टेनो पद की पूर्ती करने के लिए पत्र मुख्यालय भोपाल नहीं लिखा है।
क्या है पूरा मामला-
गुप्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट में एक पद स्टेनो का है। कलेक्टर के चैम्बर के वाहर बना एक चैम्बर में स्टेनों की नियुक्ति होती है। लेकिन बिडम्बना यह है कि जिला कलेक्ट्रेट में कई वर्षो से स्टेनो की नियुक्ति नहीं हुई है। जिला मुख्यालय ने कभी भी सरकार से इस पद की नियुक्ति के लिए प्रतिवेदन सरकार के पास नहीं भेजा है। बल्कि जिले के मछली विभाग में पदस्थ स्टेनो प्रेम सिंह को लगभग दस बारह साल से कलेक्ट्रेट में अटैच कर रखा है। उनके द्वारा ही कलेक्ट्रेट के काम काजों को किया जाता है। जबकि नियुम है कि किसी भी अधिकारी व कर्मचारी को तीन साल से अधिक अटैच कर नहीं रख सकते है। अगर तीन साल वाद अटेचमेंट से हटाया जाता है और फिर रखा जाता है तो जिस विभाग में वह अटैच रहे हों वहां दूसरी वार नहीं रखा जा सकता है। जबकि वर्तमान कलेक्टर संदीप जीआर ने भी इस ओर ध्यान देना उचित नहीं समझा है। जबकि जिला का मुख्य कार्यालय कलेक्ट्रेट माना जाता है और मुख्य कार्यालय ही अधिकारी विहीन हो तो सरकार के अनुरूप कैसे काम काज हो सकते है।
विधानसभा प्रश्र से बढ़ी समस्या-
जानकारी के अनुसार उमाकांत शर्मा ने सदन में यह प्रश्र कर जबाव मांगा था कि जिलेवार कितने अधिकारी कहां पदस्थ है और कितने वर्षो से पदस्थ है, इनके तबादले के नियम क्या है और नियम है तो कितने वर्षो से इन अधिकारियों तबादलने नहीं किए गए है। इस प्रकार प्रश्र में रिक्त पदों की भर्ती की जानकारी मांगी गई है। जिसमें भोपाल मुख्यालय द्वारा सभी जिलों के कलेक्टरों को यह आदेश भेजकर 24 जून 24 तक जानकारी मुख्यालय भोपाल उपलब्ध कराने का लेख किया गया है।
जिला प्रशासन ने अभी तक नहीं भेजी जानकारी-
गुप्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन से मध्यप्रदेश  सरकार द्वारा रिक्त पदों से संबंधित चाही गई जानकारी की अंतिम तिथि 24 जून 24 रखी गई थी। लेकिन जिला प्रशासन द्वारा इसकी जानकारी अभी तक मुख्यालय भोपाल नहीं भेजी गई है। क्योंकि सबसे बड़ी समस्या  जिला कार्यालय के स्टेनो पद को लेकर आ रही है। क्योंकि इस पद पर नियुक्ति अधिक वर्षो से नहीं हुई है। इतना जरूर हुआ है कि मछली विभाग के स्टेनो प्रेम सिंह को लगभग दस से बारह साल पहले जिला कलेक्टर के स्टेनो के लिए अटैच कर लिया गया था। अभी भी जिला मुख्यालय के कार्यालय में प्रेम सिंह अटैच है जो नियम विरूद्ध माना जा रहा है।
इनका कहना है।
कलेक्ट्रेट कार्यालय की जानकारी मुझे नहीं है। मेरे विभाग में स्टेनो के पद पर प्रेम सिंह पदस्थ है जो दस बारह साल से कलेक्ट्रेट में अटैच है और मैं अभी मार्च में पदस्थ हुआ हूॅ इसलिए और जानकारी मुझे नहीं है।
नितिन वर्मा, मछली विभाग अधिकारी, छतरपुर

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