-->
पाए सभी खबरें अब WhatsApp पर Click Now

Below Post Ad

Image
जनपद पंचायत छतरपुर में भ्रष्टाचार के बोलबाला को लेकर अफसरों ने साधी चुप्पी

जनपद पंचायत छतरपुर में भ्रष्टाचार के बोलबाला को लेकर अफसरों ने साधी चुप्पी


 


 गुणवत्ताविहीन मनरेगा कार्यो की जांच कराने उपाध्यक्ष ने लिखा पत्र


छतरपुर। भारत सरकार सहित प्रदेश सरकार ने पलायन रोकने के लिए मनरेगा योजना का गठन किया था। इस योजना के तहत होने वाले निर्माण कार्यो में गांव के ही गरीब मजदूर को सौ दिवस का कार्य देने का नियम है। लेकिन ग्राम पंचायतों में होने वाले मनरेगा के तहत निर्माण कार्यो में मजदूरों को कार्य नहीं मिलता है। ग्राम पंचायत से लेकर जनपद पंचायत में पदस्थ अधिकारियों की मनमानी के चलते मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है। कार्य को जल्द कराने के चक्कर में मशीनों का उपयोग किया जाता है। इसी वजह से ग्राम के मजदूर पलायन करने के लिए मजबूर बने हुए है। जनपद की दुर्दशा देखी जाये तो 1825 निर्माण कार्यो में केवल 118 निर्माण कार्य में मजदूर काम कर रहे है। इसी वजह से मनरेगा के कार्यो में जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। जनपद पंचायत के अंतर्गत होने वाले मनरेगा कार्यो की जांच के लिए उपाध्यक्ष ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी के नाम पत्र लिखा है। उपाध्यक्ष के पत्र पर जनपद के दो अफसरों को नोटिस जारी किए गए है।
मनरेगा कार्यो की जांच जरूरी-
जनपद पंचायत छतरपुर की उपाध्यक्ष आशा देवी यादव ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी के नाम लिखे पत्र में जनपद अंतर्गत होने वाले मनरेगा के तहत निर्माण कार्यो की जांच कराए जाने की मांग की है। क्योंकि एसडीओ केएस खरे के संरक्षण में पुराने कुओं को नया दर्शाया गया है। जिस खसरा नम्बर पर हितग्राही कुआं खोदा गया है वह खसरा नम्बर पहले से शासकीय रिकार्ड में सिंचित लिखा हुआ है। साथ ही पुराने कुओंं को नया दर्शाते हुए मूल्यांकन कर शासन की राशि का बंदरबाट किया गया है। इसी प्रकार मनरेगा के तहत जनपद पंचायत छतरपुर के अंतर्गत अन्य कार्य हुए है। अगर जिला प्रशासन द्वारा सभी मनरेगा के कार्यो की जांच की जाती है तो दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा। यह गुणवत्ताविहीन कार्यो से जनपद के अफसर लापरवाह बने हुए है।
जनपद के दो अफसरों को नोटिस जारी-
जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत छतरपुर की उपाध्यक्ष श्रीमति यादव ने माह 2 मई 24 को मनरेगा निर्माण कार्यो की जांच कराने के लिए सीईओ के नाम एक पत्र लिखा था। पत्र लिखने के बाद सीईओ ने जांच का आश्वासन  दिया था। उपाध्यक्ष द्वारा दिए गए पत्र पर जनपद में पदस्थ एसडीओ केएस खरे सहित एक अन्य को नोटिस जारी कर जबाव मांगा गया है। मनरेगा में हो रहे भ्रष्टाचार की अगर सीईओ अजय सिंह द्वारा जांच नहीं कराई जाती है तो भोपाल से लेकर दिल्ली तक मनरेगा कार्यो की जांच कराने के लिए बाद्ध होंगी।  
एसडीओ की मनमानी बनी मुशीबत-
जनपद उपाध्यक्ष ने आरोप लगाए है कि जनपद में पदस्थ एसडीओ केएस खरे मनरेगा कार्यो को भ्रष्टाचार की भेट चढ़ाने में लगे हुए है। मनरेगा के निर्माण कार्य की फाईल को मौके पर बगैर पहुुंचे अपना प्रतिशत लेकर टीएस कर देते है। पंचायतों में जितने भी मनरेगा के निर्माण कार्य चल रहे है उनकी जांच होनी चाहिए। एसडीओ केएस खरे कमीशन के चक्कर में मनरेगा की राशि को ठिकाने लगाने में पीछे नहीं रहते है। अगर समय रहते वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा मनरेगा कार्यो की जांच नहीं की जाती है तो एसडीओ इस योजना को पलीता लगाने में लगे रहेंगे।
इनका कहना है-
उपाध्यक्ष की शिकायत पर जनपद के एसडीओ केएस खरे सहित एक अन्य को नोटिस जारी कर जबाव मांगा गया है। अभी तक जबाव प्रस्तुत नहीं हुआ है। जैसे ही जबाव मिलता है उसके बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी।
अजय सिंह, सीईओ, जनपद पंचायत, छतरपुर

--- इसे भी पढ़ें ---

Ads on article

Advertise in articles 1

advertising articles 2

Advertise under the article

-->