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मरीजों की जान से खिडवाड़ करने में लगे झोलाछाप डॉक्टर जांच तक सीमित रह गईं जिला प्रशासन की कार्रवाईयां

मरीजों की जान से खिडवाड़ करने में लगे झोलाछाप डॉक्टर जांच तक सीमित रह गईं जिला प्रशासन की कार्रवाईयां

 



छतरपुर। पूरे जिले में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार मची हुई है। शहर सहित गांवों तक अपनी-अपनी दुकानें सजाए हुए है। बिना डिग्री वाले डॉक्टर लोगों की जान के दुश्मन बने हुए है। आए दिन झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज से किसी न किसी मरीज की जान चली जाती है। इसी को लेकर विगत दो तीन माह पहले कलेक्टर के निर्देश पर जांच टीमों का गठन कर कार्रवाई शुरू की गईं थीं। झोलाछाप डॉक्टरों के लिए एसडीएम, तहसीलदार, बीएमओ सहित आरआई और पटवारियों को कार्रवाई की टीम में शमिल किया गया था। इन अधिकारियों के द्वारा झोलाछाप डॉक्टरों  की जांच तक कार्रवाईंयों को सीमित रखा गया है। कई झोलाछाप डॉक्टरों की जांच की फाईलें कार्रवाई के लिए सीएमएचओ कार्यालय में पड़ी हुई है। टीमों के द्वारा पूरे जिले में जो भी जांचें की गई है वह केवल जांचों तक सीमित रह गई है और फिर से झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार जिले में देखने को मिल रही है। इन झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज से किसी न किसी गरीब मरीज की जान भी चली जाती है। पूर्व में टीमों के द्वारा जो झोलाछाप डॉक्टरों की जांचें की गई उसकी जानकारी एकत्रित कर फिर से कार्रवाई के लिए निर्देशित करना होगा नहीं तो इन झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज से गरीब मरीजों की जाने जाती रहेंगी।
जांचों में नहीं आती आंच-
जानकारी के अनुसार दो से तीन माह पहले कलेक्टर संदीप जीआर के निर्देशों पर जिले में संचालित हो रहीं फर्जी क्लीनिकों की जांच की गईं थींं। लेकिन जांच होने के दौरान जिले के सभी झोलाछाप डॉक्टरों ने अपनी-अपनी क्लीनिकों को बंद कर दिया गया था। लेकिन प्रशासन की टीमों के द्वारा कुछ क्लीनिकों पर जाकर जांच की थी और प्रतिवेदन भी बनाया गया था। लेकिन यह पूरी जांचे केवल प्रतिवेदन तक सीमित रह गई थीं। जैसे ही प्रशासन की टीमों ने जांच करना बंद किया वैसे ही जिले में मकड़ी की जांच की तरह झोलाछाप डॉक्टरों की क्लीनिकें शुरू हो गईं थीं। जिले में हजारों की संख्या में झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जाता है। इस प्रकार की कार्रवाईयों से जिले में संचालित हो रहीं फर्जी क्लीनिकों की जांचों में आंच नहीं आत है।
शहर में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार-
जिले सहित शहर की बात की जाये तो छत्रसाल चौराहे से लेकर पन्ना रोड, सटई रोड, पुराना पन्ना नाका से चंद्रपुरा तक, महाराजा कॉलेज तिराहा से पुलिस लाईन तिराहा, संकट मोचन तिराहा तक और संकट मोचन तिराहा से चौक बाजार होते हुए नारायण पुरा रोड, महोबा रोड, नौगांव रोड, सागर रोड, देरी रोड सहित शहर की गली कूचों में झोलाछाप डॉक्टरों के द्वारा मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। शहर में कई ऐसे झोलाछाप डॉक्टर है जो अपनी दुकान के वाहर कोई नाम अंकित तक नहीं करते और मरीजों का इलाज दुकान में पर्दा डालकर करने में लगे हुए है।
स्वास्थ्य विभाग बना अंजान-
जानकारी के अनुसार जिले में जितनी भी अवैध क्लीनिक संचालित हो रही है उसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को रहती है। लेकिन विगत में जो कार्रवाईयां की गई वह केवल प्रतिवेदन तक सीमित रहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ लोगों के पास इन अवैध क्लीनिक संचालकों की जानकारी उपलब्ध रहती है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक इन अवैध क्लीनिक संचालकों की जानकारी नहीं पहुंच पाती है। जब भी स्वास्थ्य विभाग का कोई वड़ा अधिकारी कार्रवाई करना चाहता है तो उस अवैध क्लीनिक संचालक के पास यह जानकारी पहुंच जाती है कि आपके यहां साहब कार्रवाई करने आ रहे हैं। जिससे वह क्लीनिक बंद कर भाग जाता है। इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग का बड़ा अधिकारी कार्रवाई नहीं कर पाता है। इसलिए या तो यह कहा जा सकता है कि स्वास्थ्य विभाग इन अवैध क्लीनिक संचालकों से अंजान बना हुआ है या फिर कार्रवाई नहीं करना चाहता है।  
इनका कहना है-
मार्च माह समाप्त होते ही अप्रैल से अवैध क्लीनिक संचालकों पर कार्रवाई की जायेगी। विभाग से सभी लिस्टों को निकलवाया जा रहा है। जैसे ही जिले में संचालित हो रही क्लीनिकों की लिस्ट उपलब्ध होती है वैसे ही अप्रैल से अवैध क्लीनिक संचालकों पर कार्रवाई करना शुरू कर दिया जायेगा।
डॉ. राजेन्द्र गुप्ता, सीएमएचओ, छतरपुर

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