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नौगाँव की विवादित अधीक्षिका लता सिंह के आगे क्यों नतमस्तक जिला प्रशासन

नौगाँव की विवादित अधीक्षिका लता सिंह के आगे क्यों नतमस्तक जिला प्रशासन

 

 छतरपुर।आदिम जाति कल्याण जिला संयोजक छतरपुर प्रियंका राय की मेहरबानी के चलते अंगद की तरह नौगांव की मलाई खाने में मस्त है अधीक्षिका लता सिंह अहिरवार।
ताजा मामला मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के अंतर्गत आने वाले नगर नौगांव के कन्या छात्रावास की विवादित अधीक्षिका लता सिंह अहिरवार से जुड़ा हुआ सामने आया है। जिनकी दुर्दांत कायशैली के चलते अक्सर समय समय पर मैडम सुर्खियां बटोरती रहती हैं। जानकारी देते हुए बताते चले कि गत वर्ष के जुलाई माह में अधीक्षिका लता सिंह का ट्रांसफर माननीय प्रभारी मंत्री की अनुशंसा पर सीधे भोपाल मंत्रालय से नौगांव से किशनगढ़ कन्या आदिवासी छात्रावास किया गया था। किंतु मैडम ने शासन के आदेश के खिलाफ तत्परता दिखाते हुए माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका दायर कर अगस्त 2023 में स्टे ऑर्डर प्राप्त कर लिया था और अपनी मलाई दार पोस्टिंग नौगांव में ही यथावत रही।
 

 तत्पश्चात आदिमजाति कल्याण विभाग से अपने प्रमोशन के लोभ के चलते अधीक्षिका मैडम द्वारा अपने द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर से  प्राप्त किए गए स्टे ऑर्डर के विरुद्ध एक झूठी याचिका कि आदिमजाति कल्याण विभाग ने अधीक्षिका लता सिंह अहिरवार का स्थानांतरण निरस्त कर दिया। माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में जरिए शपथ पत्र के दायर किया। जिस पर संज्ञान लेते हुए न्यायमूर्ति जी एस अहलूवालिया की अदालत ने दिनांक 27/10/2023 को उक्त याचिका पर सुनवाई कर उसे मैडम को वापिस लेने की अनुमति पर मोहर लगा दी। गौरतलब है कि इस पूरे खेल में अधीक्षिका लता सिंह के साथ छतरपुर आदिम जाति कल्याण विभाग की जिला संयोजक प्रियंका राय की भूमिका संदेह के घेरे में है।
वैसे कहा जाए तो अधीक्षिका लता सिंह अहिरवार का विवादों से नाता काफी पुराना माना जाता है, सन 2014-15 में बूदौर निवासी बच्ची की छात्रावास में मौत का मामला हो अथवा नायब तहसीलदार नौगांव परशुराम गुप्ता का तहसील की टीम सहित मैडम के छात्रावास से राशन गल्ला का अवैध भंडारण जब्त करना हो या फिर अपने खासम खास स्थानीय छुट भईए नेताओं के साथ प्रशासन से चोरी छिपे कन्या छात्रावास में बच्चियों के साथ कार्यक्रम करवाना हो सभी मामलों में अधीक्षिका लता सिंह अहिरवार मैडम का शायद ही कोई सानी हो। हर तरह की विद्या और कोप लीला में मैडम अधीक्षिका की दक्षता सर्वोत्तम दर्जे की है और अपनी इसी दुर्दांत कार्यशैली के मायाजाल में वर्तमान छतरपुर आदिमजाति कल्याण विभाग जिला संयोजक मैडम प्रियंका राय को भी ले लिया है। जिसमे किस तरह माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के आदेशों का मखौल उड़ाते हुए मध्य प्रदेश शासन के स्थानांतरण आदेश को ठेंगा दिखाया जा रहा।
मजे की बात ये है कि ये पूरा सिस्टम सग्गा छतरपुर जिले के ईमानदार और कर्तव्य परायण कलेक्टर संदीप जे.आर की जानकारी में ही नहीं आने दिया गया। बल्कि पूरा का पूरा खेल अधीक्षिका लता सिंह अहिरवार के द्वारा जिला संयोजक मैडम की दया याचिका पर ही खेल लिया गया जो अब शासन प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।
अब देखना ये होगा कि लता सिंह अहिरवार अपनी जिद और विवाद के दम पर नौगांव अधीक्षिका बनी रहेंगी या फिर सारे मामले की जांच होकर मैडम को किशनगढ़ ही जाना पड़ेगा।

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