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जब शराब की गंध में सरकार और उसका पूरा तंत्र मदहोश हो तो जनता का दर्द कौन सुनेगा

जब शराब की गंध में सरकार और उसका पूरा तंत्र मदहोश हो तो जनता का दर्द कौन सुनेगा



नौगांव डिसलरी जिसने पिछले ढाई दशक से पूरे क्षेत्र को तबाह कर दिया है पर लोकतंत्र वह राजतंत्र बना हुआ है जहाँ आम जनता की धीमे जहर से होती मौतो के बाद भी रसूखदारों का सिक्के की क़द्र है। कहते है दमड़ी करें सब काम। सरकार और उसका पूरा तंत्र बिकाऊ है, बस खरीदने वाला होना चाहिये। इसी बिकाऊ तंत्र के कारण सीलप नदी जहरीली हो गई, कई गाँवो का भूजल जहरीला हो गया और जमीने बंजर हो गई। इसके बाद भी शराब की गंध की मदहोशी से सभी जिम्मेदार मस्त है। मुख्यमंत्री की हेल्पलाइन भी नौकरशाहो के चुंगल में है।जहाँ क्षेत्र को तबाह करने वाली डिसलरी की शिकायत की गई तो डिसलरी के पक्ष में प्रदूषण नियंत्रण के क़सीदे पढ़ते हुए शिकायत को बंद कर दिया गया। अब यहीं सवाल है कि जब पूरा तंत्र ही धतराष्ट्र बना हो तो पीड़ा सुनेगा कौन? छतरपुर जिले के खूबसूरत नगर नौगांव से चंद किलोमीटर दूर एक शराब के उद्योग ने पूरे क्षेत्र में तबाही की गाथा लिख दी है। इस क्षेत्र के दर्जनों गाँवो के लोग इस जहरीली त्रासदी को पिछले कई दशकों से भुगतते आ रहे है। स्थानीय नदी, छोटे बड़े नाले इस डिसलरी से निकलने वाले प्रदूषित पानी के कारण अपना रंग बदल चुके है। खेती की जमीने और जंगल बंजर होते जा रहे है। भूमिगत जल भी जहरीला होकर बीमारियां फैला रहा है। यानि डिसलरी का प्रदूषण एक आतंकवाद की तरह हो चुका है लेकिन अफ़सोसजनक है कि स्थानीय प्रशासन, घोषणाओ और वादों में वोट बटोरने वाले जन प्रतिनिधियों को ना जाने यह तबाही दिखाई नहीं देती। आमजनता बेड फील कर रही है पर जिम्मेदार गुड़ फील में है। पिछले दिनों नौगांव नगरपालिका के उपाध्यक्ष दौलत तिवारी ने क्षेत्र के प्रभावित ग्रामीणों के साथ स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन इत्यादि सौंपा तब लग रहा था कि भीषण आपदा के इस मुद्दे पर प्रशासन कार्यवाही करेगा। आरोप लगते है कि प्रशासन और नेताओं का डिसलरी संचालक से फेविकोल का जुड़ाव है जो सभी की आँखों पर पट्टी बंधवा देता है। यह डिसलरी ग्राम शिकारपुरा में स्थित है जिसकी नौगांव नगर से दूरी महज पाँच किमी है। डिसलरी के पास से ही स्थानीय नदी सिलप बहती है जो आगे जाकर ग्राम गर्रोली में धसान में मिलती है। कुछ दशकों पहले सीलप नदी किसानो के लिये वरदान थी जिसे डिसलरी के प्रदूषित पानी ने अभिशाप बना दिया है। कई सौ एकड़ भूमि को तबाह कर बंजर बना दिया है। हालात इस कदर गंभीर है इस क्षेत्र में पेड़ भी सूख गये है। शिकारपुरा सहित दर्जनों गाँवो धोर्रा, चंदपुरा, गंज, घिसल्ली , रावतपुरा, गर्रोली में हैंडपम्प, कुओं का पानी तक प्रदूषित हो चुका है। यहीं पानी जल आपूर्ति का माध्यम है जिसे पीने से गंभीर बीमारियों से हजारों लोग पीड़ित है। डिसलरी की मानवकारित आपदा से नौगांव नगर भी अछूता नहीं है। डिसलरी की बदबू से एक बड़ा इलाका परेशान है। वहीं सीलप नदी का प्रदूषित पानी जिस धसान नदी में मिलता है, उसी गर्रोली प्लांट से नौगांव नगर में पानी की सप्लाई होती है। यानि धीमा जहर नौगांव नगर को मिल रहा है। स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन और सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के बाद भी कार्यवाही ना होना डिसलरी संचालक की सत्ता और उसके प्रशासनिक तंत्र में ताकतवर पेंठ की तरफ इशारा करता है। सीएम हेल्पलाइन की शिकायत में तो स्थानीय प्रशासन ने डिसलरी पर उमड़ रहे प्रेम की सीमाओं को जता दिया। जिस डिसलरी के प्रदूषित पानी से हजारों लोग प्रभावित हों और क्षेत्र में तबाही के निशान साफ दिखाई दे रहे हों पर सीएम हेल्पलाइन की शिकायत में प्रशासन को यह दिखाई नहीं देता। यानि सीएम हेल्पलाइन का फर्जी प्रतिवेदन जो डिसलरी की गंध से फील गुड़ का नारा बुलंद करता है। अब इस मामले को लेकर एनजीटी में याचिका दायर करने की तैयारी है।

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