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 जौरा के पूर्व तहसीलदार द्वारा बनवाए गए 916 फर्जी बीपीएल राशन कार्ड को एसडीएम ने निरस्‍त कर दिया

जौरा के पूर्व तहसीलदार द्वारा बनवाए गए 916 फर्जी बीपीएल राशन कार्ड को एसडीएम ने निरस्‍त कर दिया

 

 

मुरैना । जौरा एसडीएम प्रदीप तोमर ने 916 फर्जी बीपीएल राशन कार्ड निरस्त किए हैं। बीते 20 दिन में जौरा एसडीएम 1 हजार 286 बीपीएल राशन कार्ड निरस्त कर, इन फर्जी गरीबों के नाम गरीबी रेखा की सूची से साफ करवा चुके हैं। दरअसल, जौरा में तीन से पांच हजार रुपये की घूस लेकर अपात्रों के बीपीएल राशन कार्ड बनाने का खेल पूर्व तहसीलदार नरेश शर्मा के कार्यकाल में जमकर चला, जिसकी परतें अब खुलती जा रही हैं। यह मामला बड़े स्तर पर जा पहुंचा है, जिसमें वर्तमान में भिंड जिले में पदस्थ तहसीलदार नरेश शर्मा पर कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।

जौरा एसडीएम प्रदीप तोमर ने जिन 916 फर्जी बीपीएल राशन कार्ड को निरस्त किया है, उनमें जौरा तहसील के 36 गांव के लोगों के नाम हैं। यह सभी राशनकार्ड तत्कालीन तहसीलदार नरेश शर्मा के कार्यकाल 1 सितंबर 2022 से 27 मार्च 2023 के बीच बने हैं, जिसमें अधिकांश अपात्र हैं। इन फर्जी बीपीएल राशनकार्ड और हजारों रुपये लेकर बीपीएल राशनकार्ड बनाए जाने की शिकायत पूर्व विधायक महेशदत्त मिश्रा ने संभाग आयुक्त तक से की थी। इसी शिकायत के बाद 17 मई को कलेक्टर अंकित अस्थाना ने जांच के आदेश दिए। जांच करने वाले एसडीएम प्रदीप तोमर ने 5 दिसंबर को 370 फर्जी बीपीएल राशनकार्ड निरस्त किए थे, इसके बाद अब 916 फर्जी गरीबों पर कार्रवाई की है। अब प्रशासन जांच कर रहा है, कि इन फर्जी बीपीएल कार्ड से अपात्र लोगों ने राशन के साथ-साथ किन-किन योजनाओं का लाभ गलत तरीके से लिया है।

जांच में इन गड़बड़ियों का हुआ जिक्र -

तत्कालीन तहसीलदार नरेश शर्मा के कार्यकाल में बने उक्त राशन कार्डों का तहसील व एसडीएम कार्यालय में कोई रिकार्ड ही नहीं है। तहसीलदार नरेश शर्मा ने पटवारियों से आवेदन लेकर इन्हें आवक-जावक शाखा से जनपद पंचायत सीईओ को भेज दिया। बीपीएल कार्ड के लिए किए गए आवेदनों की प्राथमिक आर्डरशीट में न तो तारीख तक दर्ज नहीं है। जो राशनकार्ड निरस्त किए गए हैं, उनके आवेदन फार्म तक में जानकारी पूरी नहीं है। अधिकांश में नाम पूरे नहीं लिखे और आवेदन के हस्ताक्षर तक नहीं थे। कई आवेदन ऐसे पाए गए, जिनमें ऐसे पटवारियों के नाम व हस्ताक्षर पाए गए हैं, जो उन हल्कों में कभी पदस्थ ही नहीं रहे। यानी पटवारियों के भी फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं।

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