विज्ञापन

Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS

Breaking Posts

Right Post

सड़क नहीं मिली तो खाट बनी एंबुलेंस

 


मोहित जैन

बक्सवाहा। आकांक्षी विकासखंड बक्सवाहा में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी हकीकत एक बार फिर सामने आई है। ग्राम पंचायत निमानी के मझरा टोला पडसिला में रविवार को प्रसव पीड़ा से परेशान 23 वर्षीय तुलसा भिलाला पति अमन भिलाला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को खाट का सहारा लेना पड़ा।

बारिश के कारण गांव तक पहुंचने वाला कच्चा रास्ता कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गया था। परिजनों द्वारा जननी एक्सप्रेस को सूचना देने के बावजूद करीब तीन घंटे तक वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका। महिला की हालत को देखते हुए ग्रामीणों ने उसे खाट पर लिटाया और करीब 2 किलोमीटर तक कीचड़ भरे रास्ते से पैदल मुख्य मार्ग तक पहुंचाया। इसके बाद निजी वाहन से महिला को अस्पताल ले जाया गया।
कलेक्टर और विधायक से भी मांगी मदद
परिजनों के अनुसार, तुलसा को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद जननी एक्सप्रेस के लिए सूचना दी गई थी। वाहन का इंतजार लंबा होने पर परिजनों ने जिला कलेक्टर और स्थानीय विधायक रामसिया भारती से फोन पर मदद मांगी। परिजनों का कहना है कि दोनों स्तरों से मदद का आश्वासन मिला, लेकिन तत्काल वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका। मजबूर होकर ग्रामीणों ने खाट को ही अस्थायी एंबुलेंस बना लिया।
2022 में जमा हुई सड़क की फाइल, आज भी इंतजार
सड़क निर्माण को लेकर ग्राम पंचायत स्तर से कई वर्ष पहले प्रस्ताव भेजे जाने की बात सामने आई है। ग्राम पंचायत सचिव महेश शुक्ला ने बताया कि 17 अक्टूबर 2022 को सड़क निर्माण संबंधी फाइल तैयार कर जमा की गई थी। इसके बाद छतरपुर से जांच दल ने मौके का निरीक्षण भी किया, लेकिन अब तक सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
वहीं ग्राम पंचायत निमानी की सरपंच लक्ष्मी जगदीश यादव के मुताबिक, सड़क निर्माण के लिए जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन अब तक सड़क स्वीकृत नहीं हुई।
बारिश में गांव बन जाता है टापू
ग्रामीणों अंनतर सिंह बारेला, भूरे सिंह भिलाला, कैरम भिलाला, रंजीत भिलाला, ज्वान सिंह भिलाला, सुनील भिलाला और भरत भिलाला सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में गांव तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है। कीचड़ के कारण वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते और आपात स्थिति में मरीजों को पैदल मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के अभाव में गर्भवती महिलाओं, गंभीर मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। उनका सवाल है कि जब आपात स्थिति में एंबुलेंस तक गांव नहीं पहुंच सकती और मरीज को खाट पर ले जाना पड़े, तो विकास के दावों का लाभ आखिर इन ग्रामीणों तक कब पहुंचेगा?
वन क्षेत्र में बसे हैं 8 से 10 आदिवासी परिवार
ग्रामीणों के अनुसार पडसिला सरकारी रिकॉर्ड में अलग गांव के रूप में दर्ज नहीं है। यह निमानी पंचायत का मझरा टोला है और वन विभाग के क्षेत्र में आता है। गोरानाद से इसकी दूरी करीब 4 से 5 किलोमीटर बताई गई है। यहां करीब 8 से 10 आदिवासी परिवार रहते हैं, जिनकी आबादी लगभग 60 से 70 है। वहीं गोरानाद में करीब 38 परिवार और 216 की आबादी बताई गई है।
अब सवाल यह है कि वर्ष 2022 में सड़क की फाइल जमा होने और जांच होने के बाद भी ग्रामीणों को सड़क के लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा?

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |