छतरपुर। जिला प्रशासन और गौसेवक भले ही गौवंश को सहेजने के लिए प्रयासरत हों लेकिन आवारा गौवंश अब भी सड़कों पर बैठ रहा है और हादसों में काल का ग्रास बन रहा है। ताजा मामला जिले के बमीठा थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां बीती रात हुई एक घटना में आधा दर्जन से अधिक गौवंश की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद कलेक्टर का वह आदेश भी चर्चा में है, जो कुछ दिन पहले उनके द्वारा जारी किया गया था। दरअसल उक्त आदेश में कलेक्टर ने आवारा गौवंश को पकड़कर गौशाला भेजने के निर्देश दिए थे लेकिन उसका पालन नहीं हुआ।प्राप्त जानकारी के अनुसार झाँसी-खजुराहो फोरलेन पर गंज ओवरब्रिज के पास रात के वक्त किसी अज्ञात वाहन ने आधा दर्जन से अधिक गौवंश को रौंद दिया। आरोप है कि घटना के कुछ समय बात ही स्थानीय लोगों ने फोरलेन ऑथ्योरिटी को सूचना दी थी लेकिन कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, परिणामस्वरूप गौवंश के क्षत-विक्षत शव रात भर सड़क पर पड़े रहे। फोरलेन पर आए दिन हो रही इस तरह की घटनाओं से लोगों में आक्रोश पनप रहा है। इस मामले में गौसेवकों ने अज्ञात के विरुद्ध मामला दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की है। इसके साथ ही गौसेवकों ने कलेक्टर द्वारा कुछ दिन पहले जारी किए गए उस आदेश पर भी सवाल उठाए हैं, जिसमें कलेक्टर ने प्रशासनिक अमले को आवारा गौवंश को गौशाला भेजने के निर्देश दिए थे। गौसेवकों ने बताया कि क्षेत्र में दर्जनों गौशालाएं संचालित हो रही हैं, जिनके संचालक कागजों में गौवंश की संख्या दिखाकर शासकीय राशि को हड़पने का काम कर रहे हैं। यदि गौशाला संचालक ईमानदारी से काम करें तो सड़कों पर बैठने वाले गौवंश को आश्रय मिल सकता है, साथ ही इस तरह की दुर्घटनाओं से भी उन्हें बचाया जा सकता है।

