नौगांव। नगर की लगभग एक लाख की आबादी और आसपास के 50 से अधिक गांवों के छात्रों के लिए संचालित शासकीय पीएम श्री बापू महाविद्यालय इन दिनों स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है। कॉलेज में करीब 5 से 6 हजार छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन इनके मार्गदर्शन के लिए स्थायी रूप से केवल पांच प्रोफेसर ही तैनात हैं।
करीब सात वर्ष पूर्व शासन ने करोड़ों की लागत से आधुनिक भवन बनवाकर नगर को बड़ी सौगात दी थी। कॉलेज की सीटें भी बढ़ाई गईं और रोजगारमूलक कक्षाएं संचालित करने के आदेश जारी हुए। लेकिन आज तक पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो सकी। शासन ने लगभग 70 स्टाफ पदों को स्वीकृत किया था, किंतु अब तक नियुक्तियां नहीं हो पाईं।
वर्तमान में कॉलेज में पांच स्थायी प्रोफेसरों के साथ एक अतिरिक्त, चार एडहॉक और आठ अतिथि विद्वान कार्यरत हैं। जबकि यहां बीएससी, एमए सहित रोजगारमूलक कोर्स संचालित किए जा रहे हैं, जिनके लिए करीब 30 कक्षाओं की आवश्यकता है। इसके अलावा लाइब्रेरी, खेलकूद और कार्यालय कार्यों के लिए भी स्थायी रूप से केवल एक कर्मचारी ही तैनात है। नतीजा यह है कि पढ़ाई के साथ-साथ अधिकांश प्रशासनिक कार्य भी अध्यापक ही निपटाने को मजबूर हैं।
छात्रों का भविष्य संकट में
स्टाफ की कमी के चलते कक्षाओं का नियमित संचालन नहीं हो पा रहा। हाल ही में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन भी किया था। उनका कहना है कि पढ़ाई सही ढंग से न होने के कारण परीक्षा परिणाम प्रभावित हो रहे हैं और कई छात्रों को शून्य या कम अंक मिले।
सरकार जहां उच्च शिक्षा में रोजगारमूलक पढ़ाई पर जोर दे रही है, वहीं नौगांव का यह कॉलेज शिक्षकों की कमी के कारण केवल कागजों तक ही सीमित होकर रह गया है। इस गंभीर समस्या पर न तो प्रशासन और न ही जनप्रतिनिधियों का ध्यान जा रहा है, जिससे छात्रों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।

