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 मुंबई की अदालत ने धोखाधड़ी के मामले में कम्पउण्डर को सुनाई सजा

मुंबई की अदालत ने धोखाधड़ी के मामले में कम्पउण्डर को सुनाई सजा


छतरपुर। मप्र के आयुष विभाग के अंतर्गत शासकीय आयुष अस्पताल ग्राम रामपुर ढिलापुर में कम्पाउण्डर के पद पर पदस्थ एक कर्मचारी के विरूद्ध मुंबई की एक अदालत ने लेनदेन में धोखाधड़ी करने के मामले में सजा सुनाई है। इसके बावजूद यह कर्मचारी लगातार विभाग को अपनी सेवाएं दे रहा है और वेतन ले रहा है। चौकाने वाली यह है कि विभाग को यह सब जानकारी होने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की जा रही।
ये है मामला
मुंबई में पदस्थ बैंककर्मी भूपेन्द्र साहू ने एक शिकायती आवेदन देते हुए आयुष विभाग को बताया है कि जतारा निवासी हनीफ अजीत खान के विरूद्ध मुंबई में लेनदेन और धोखाधड़ी से जुड़ी एक शिकायत की गई थी। वर्ष 2019 में की गई इस शिकायत पर आरोपी हनीफ अजीत खान दोषी पाए गए। 5 मार्च 2024 को अदालत ने फैसला सुनाते हुए उन्हें एक साल की सजा और 18 लाख रूपए का जुर्माना सजा दिनांक से 9 प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करने के आदेश दिए। इसके बावजूद आरोपी गिरफ्तारी से बचते हुए अपने आयुष कार्यालय की मेहरबानी से ग्राम रामपुर ढिलापुर में नौकरी करते हुए वेतन ले रहा है। उक्त आरोपी के विरूद्ध भूपेन्द्र साहू के द्वारा आयुष कार्यालय सतपुड़ा भवन भोपाल, संभागीय आयुष अधिकारी व जिला आयुष अधिकारी छतरपुर को लिखित पत्र भी दिए गए लेकिन कोर्ट के आदेश को दरकिनार करते हुए विभाग ने न तो कर्मचारी को निलंबित किया और न ही बर्खास्त किया। इस मामले में भूपेन्द्र साहू ने अब वरिष्ठ अधिकारियों को दोबारा पत्र लिखा है।
इनका कहना-
इस संबंध में हमें जानकारी मौखिक रूप से प्राप्त हुई है। लिखित में वरिष्ठ कार्यालय द्वारा कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं। जब हमें लिखित में निर्देश मिलेंगे तभी हम अपने कर्मचारी के विरूद्ध कोई कार्यवाही करेंगे।
डॉ. निर्मला कुशवाहा, जिला आयुष अधिकारी, छतरपुर

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