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छतरपुर की असली समस्या कूड़ा और आवारा पशु

छतरपुर की असली समस्या कूड़ा और आवारा पशु


छतरपुर।छतरपुर को भले ही नगर निगम का दर्जा मिल रहा हो और स्वच्छता में इसके पायदान में मामूली बढौतरी हुई हो, लेकिन असलियत यह है कि गली मुहल्लों ही नहीं, मुख्य मार्गों पर कूड़ा, कूड़े के बेहतर निस्तारण का अभाव और  हर जगह घूमते आवारा मवेशी, शहर की सुन्दरता और यातायात व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह हैं । 

यह सभी जानते हैं कि शहर का अनियोजित विस्तार हुआ और जहां बस्तियां बनीं, वहीं पहले  सब्जी वालों की अस्थाई दुकाने लगने लगीं , शहर के हर हिस्से में हर दिन साप्ताहिक बाज़ार भरते हैं सो अलग। इस तरह सारे शहर में ढेर सारा  सब्जी-फल का ही कचरा बनता है । इसके अलावा शहर में पोलीथिन की थैलियों पर पाबन्दी लग नहीं पाई। 

अब जहां कूड़ा , खासकर  खाने लायक सामग्री एकत्र होती है , वहां मवेशी जमा हो ही जाते हैं। कचरा हो या मवेशी, दोनों ही जनजीवन के लिए ख़तरा हैं।  काश नगर पालिका हर हाट- बाज़ार के बाद और हर छोटी-बड़ी सब्जी मंडी में शाम होते ही सफाई करवाए और हरा कचरा अलग कर किसी ऐसे स्थान पर जमा कर दे, जहां आवारा पशुओं को घेर कर रखा जा सके। इससे पशुओं को पर्याप्त आहार मिलेगा, वे सडक-मुहल्लों में घूमेंगे नहीं, साथ ही  खासकर बदबू फ़ैलाने वाले ओरगेनिक कचरे से मुक्ति भी मिल जायेगी।

शहर हो या मुख्य सड़को पर घूमते मवेशी सड़क दुर्घटनाओ का भी कारण बन रहे है। शहर की सड़को पर सांडो की भिड़ंत अक्सर देखी जाती है। जरूरत है उचित व्यवस्था की जिसमे मवेशीयो के हुड़दंग का निराकरण हो और कचरे का उचित उपयोग।

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