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रोड पर ही मकान बनाने अड़े सरकार,एक पटवारी हैं तो दूसरे तहसीलदार

रोड पर ही मकान बनाने अड़े सरकार,एक पटवारी हैं तो दूसरे तहसीलदार

 


छतरपुर। जब बाड़ ही खेत को खाने लगे तो खेत क्या करे यह कहावत राजस्व विभाग में ही पदस्थ एक पटवारी तो दूसरे तहसीलदार के कारनामों पर बिल्कुल सटीक बैठती है। यह मामला है बाहुबली पुरम् कालोनी का जो तहसील छतरपुर के प. ह. नं.51 में खसरा क्रं.2970/3/2/1ख,2970/2/2/ख एवं 2970/3/2/1ग में नगर पालिका छतरपुर के वार्ड क्रमांक 15 में सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल के बगल में संकटमोचन मार्ग पर स्थित हैं।यहाँ कई महीने पहले कालोनी रहवासियों को कालोनी विकास के लिए नगर तथा ग्राम निवेश कार्यालय छतरपुर से जारी आदेश व स्वीकृत हुए प्रस्तावित ले आउट में प्रस्तावित रोड को ही विक्रय करने की जानकारी लगी थी।जिसकी जानकारी कालोनी रहवासियों ने नगरपालिका,तहसील,कलेक्टर कार्यालय छतरपुर को शिकायती आवेदन देकर कार्यवाही की मांग की।जिसमें संबंधित दोषियों पर आज दिनांक तक संबंधित अधिकारीयों व्दारा न कोई कानूनी कार्यवाही की गई न ही उनके कारनामों पर रोक लगाने के प्रयास किये गये।इस मामले में कई बार आवेदन देने के बाद भी कानूनी कार्यवाही न होने की जो वजह सामने आई है ।उसमें राजस्व विभाग में ही पदस्थ पटवारी सुखदेव यादव व तहसीलदार आनंद जैन का नाम सामने आ रहा है। जिन्होंने अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति करने कॉलोनाइजर अभय कुमार जैन के साथ मिलकर कालोनी के रोड का सौदा तय कर रजिस्ट्री करवा ली और अपने पद व विभाग का दुरूपयोग करने के लिए कालोनी के उस रोड पर अबैध निर्माण करने की जिम्मेदारी ले ली। जो नगर तथा ग्राम निवेश कार्यालय छतरपुर से स्वीकृत ले आउट में पहले से ही दूसरे मुख्य रोड के रूप में चिन्हित है।


लेकिन तहसीलदार आनंद जैन ने यह जिम्मेदारी बखूबी निभाई जो उनके व्दारा रोड पर बनाई गई वाऊंड्री से स्पष्ट हो रहा है।इसके बाद पटवारी सुखदेव यादव ने अपनी जिम्मेदारी संभाली और रात्रि में उक्त रोड पर बोरवेल कर मकान निर्माण करने की तैयारियां शुरू कर दीं है।जिसकी जानकारी बाहुबली पुरम् कालोनी रहवासीयों ने शुक्रवार को सीएमओ नगर पालिका छतरपुर,तहसीलदार,एसडीएम,सहायक संचालक नगर तथा ग्राम निवेश एवं कलेक्टर छतरपुर के नाम आवेदन देते हुए अबैध निर्माण हटाने व उस पर रोक लगाने की मांग करते हुए संबंधित दोषियों पर कानूनी कार्यवाही करवाने की मांग की है।अबैध निर्माण के मामले में राजस्व विभाग के पटवारी व तहसीलदार का नाम सामने आने से जन चर्चा में यह कहावत कही सुनी जा रही है कि जब बाड़ ही खेत खाने लगे तो खेत क्या करे।जिससे शासन प्रशासन की छबि धूमिल हो रही है,अब देखना ये हैं कि शासन प्रशासन के आलाधिकारी अपनी छबि बचाने में कामयाब रहते हैं या राजस्व विभाग में पदस्थ उक्त पटवारी एवं तहसीलदार रोड पर ही मकान बना कर शासन प्रशासन की किरकिरी करवाने में अपनी शान समझते हैं।

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