छतरपुर। शहर के महल रोड पर रविवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक खुला हुआ नाला बेजुबान जानवर के लिए काल बन गया। रात्रि करीब 9:00 बजे एक बैल अचानक इस गहरे और खुले नाले में जा गिरा। हादसे के बाद बैल नाले में बुरी तरह तड़पने लगा, जिसे देख आसपास के लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। स्थानीय नागरिकों ने अपने स्तर पर बैल को बाहर निकालने की काफी मशक्कत की, लेकिन सफलता नहीं मिली। बैल नाले के भीतर बुरी तरह फंसकर जख्मी हो चुका था। इसके बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत क्षेत्र के सक्रिय गौ रक्षकों को फोन पर मामले की सूचना दी।
सूचना मिलते ही गौ रक्षक अनुराग सिंह अपनी टीम के साथ बिना वक्त गंवाए तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थानीय लोगों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और काफी कड़े प्रयासों के बाद बैल को सुरक्षित नाले से बाहर निकाल लिया गया। हालांकि, पत्थरों और चेंबर के नुकीले हिस्सों से टकराने के कारण बैल को काफी चोटें आई हैं, जिसका इलाज किया जा रहा है।
इसी दौरान वहां से गुजर रहे डायल 112 के वाहन चालक धर्मेंद्र गोस्वामी की नजर वहां जुटी भीड़ पर पड़ी। मामले की गंभीरता को देखते हुए धर्मेंद्र तुरंत अपनी गाड़ी रोककर मौके पर पहुंचे। उन्होंने बिना वक्त गंवाए स्थिति को संभाला और स्थानीय लोगों के सहयोग से एक रेस्क्यू प्लान तैयार किया। धर्मेंद्र गोस्वामी ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए रस्सियों और उपलब्ध संसाधनों का इंतजाम किया। उन्होंने खुद आगे बढ़कर बेहद सावधानी के साथ बैल को रस्सियों से बंधवाया, ताकि उसे और चोट न लगे। कड़ी मशक्कत और सूझबूझ से किए गए प्रयासों के बाद आखिरकार बैल को सुरक्षित और सकुशल बाहर निकाल लिया गया। स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन और नगर पालिका सीएमओ से पुरजोर मांग की है कि इन जानलेवा खुले नालों और गड्ढों को तुरंत सुधारा जाए, ताकि भविष्य में किसी इंसान या बेजुबान जानवर की जान न जाए।

