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चार दिवार अंदर बैठे कलेक्टर ने गेट पर लगवाए ताले

चार दिवार अंदर बैठे कलेक्टर ने गेट पर लगवाए ताले

 


जनता की फरियाद सुनने के लिए बैठे साहब से नहीं मिल पा रहे फरियादी


छतरपुर। भारत सरकार सहित प्रदेश सरकार ने हर जिले में जिला प्रशासन को बैठाया है। पूरे जिले की समस्याओं को सुनने के लिए जिला प्रशासन को नियुक्त किया है। प्रदेश के हर जिले के कलेक्टरों द्वारा जिले की समस्याएं और जिले की व्यवस्था सहित सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन करने की जिम्मेवारी है। जिसको जिले के कलेक्टरों द्वारा काम किया जाता है। 

लेकिन छतरपुर जिले में पदस्थ कलेक्टर संदीप जीआर की कहानी कुछ अलग ही है। उनकी जनता की समस्याएं और जिले की व्यवस्थाओं पर तो नजर रहती है। लेकिन कलेक्ट्रेट परिसर में जाने के लिए पूरी तरह से उन्होंने घेराबंदी करते हुए गेटों में ताला लटका दिया है। गेट नम्बर 02 पर सहित मेलाग्राउण्ड तरफ के गेट पर ताला लगा दिया है। जबकि परिसर का गेट नम्बर एक का ताला खुला है लेकिन अंदर बैरिकेट लगवा दिए और गार्ड नियुक्त होने के कारण गेट नम्बर एक से भी गांव के भोले भाले लोग साहब से नहीं मिल पा रहे है।   दूर दराज से आने वाले पीडि़त कलेक्टर को अपनी फरियाद भी नहीं सुना पा रहे है। क्योकि कलेक्टर साहब चार दीवार के अंदर बैठे होने के कारण  पीडि़त निराशा लिए बापिस अपने घर चले जाते है।
दो गेटों पर लटके ताले-
जानकारी के अनुसार जिले में कई कलेक्टर आए और चले भी गए। लेकिन किसी भी कलेक्टर ने मेलाग्राउण्ड तरफ वाले गेट पर ताला नहीं लगाया है। इसी प्रकार गेट नम्बर दो पर भी कभी ताला नहीं लगता था। लेकिन जब से जिले की कमान कलेक्टर संदीप जीआर को मिली है। तभी से मेलाग्राउण्ड का गेट सहित नम्बर दो गेट पर ताला लगा रहता है। भोली भाली जनता अपनी पीड़ा सुनाने के लिए जिलाधीश के पास आती है लेकिन गेटों में ताले लटके देख निराश होकर बापिस अपने घर की ओर लोट जाती है। क्योंकि जिस गेटों पर ताला लगा रहता है वहां किसी से अगर पीडि़त पूंछता है तो उसे गुराह करने वाला जबाव मिलता है। इसलिए वह अपनी व्यथा जिलाधीश को नहीं सुना पाता है। इस प्रकार से जतना परेशान होती है और जिलाधीश चार दीवार के अंदर बैठे रहते है। सागर रोड़ स्थित गेट नम्बर दो और मेलाग्राण्उड तरफ के गेट पर ताला लटका रहता है। इसी वजह से जनता को अपनी फरियाद की जगह निराशा ही हाथ लगती है।
गेट नम्बर एक के अदर लगे बेरिकेट-
कलेक्ट्रेट परिसर में अव्यवस्था न फैली इसके लिए जिलाधीश ने अच्छी व्यवस्था कर रखी है। लेकिन इस परिसर में बैठे अधिकारी जनता की समस्या और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने का भी काम भी करते है। जिलधीश द्वारा जो कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश करने के लिए गेट नम्बर एक को ही खोल रखा है। लेकिन जब गेट के अंदर प्रवेश करों तो बैरिकेट लगे हुए है। जिससे गांवों से आने वाली भोली भाली जनता गुमराह हो जाती है और अपनी पीड़ा जिलाधीश तक नहीं पहुंचा पाती है। एक समय था कि जनता की पीड़ा सुनने के लिए मेलाग्राउण्ड का गेट खुला रहता था और पूर्व में रहे कलेक्टर साहब चैम्बर से आकर जनता की पीड़ा सुना करते थे। दो गेट बंद होने से जिले की जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कलेक्टर चैम्बर तक पहुंचना हुआ मुश्किल-
जानकारी के अनुसार कलेक्टर संदीप जीआर चार गेट के अंदर बैठते है। उनके गेट के वाहर लगभग सात कर्मचारी भी नियुक्त रहते है। जो दो सिफ्टों में काम करते है। लोग अपनी फरियाद लेकर कलेक्टर साहब के पास जाते है। उनके पास जाने के पहले दो गेट पार करना पड़ते है। दो गेट पार करने के बाद गेट पर खड़े कर्मचारियों से मिलना पड़ता है। उसके बाद भी दो गेट और पार करना पड़ता है जब कहीं जाकर कलेक्टर साहब से फरियादी की मुलाकात हो पाती है। कई बार तो यह देखने को मिला है कि जिले के दूर दाराज से आए लोग कलेक्ट्रेट परिसर के चक्कर काटते रहते है। जब तक अंदर पहुंचते है तब तक साहब लंच या फिर कहीं टूर पर चले जाते है। इसलिए पीडि़त मिल नहीं पाता और निराशा लिए बापिस घर लौट जाता है।
इनका कहना है
सडक़ दुर्घटना के कारण गेट नम्बर दो को बंद रखा गया है। जरूरत पडऩे पर उसे खोला जाता है। मेलाग्राउण्ड तरफ  वाले गेट कलेक्टर साहब ने बंद रखने के लिए बोला है। गेट नम्बर एक से आवेदन लिए जाते है। पहले क्या सिस्टम था हम नहीं बता सकते है।
जीएस पटैल, प्रभारी अधिकारी नाजिर, छतरपुर

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