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पुलिस परेड ग्राउंड से लेकर जिला अधिकारी कार्यालय गेट तक पदयात्रा निकाल किया प्रदर्शन कर

 


हमीरपुर। जेल में निरुद्ध विचाराधीन बंदी की पिटाई के बाद हुई मौत के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सोमवार को मृतक के परिजनों के साथ राष्ट्रीय सवर्ण परिषद के प्रांत प्रचारक सचिन तिवारी और उनके कार्यकर्त्ताओं ने परेड ग्राउंड से लेकर कलेक्ट्रेट तक पदयात्रा निकाल प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री से सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौपा है। वहीं इस घटना के विरोध में शिवसेना ने गोल चबूतरे में धरना प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री से सम्बोधित ज्ञापन अतिरिक्त एसडीएम को सौपा है।सदर कोतवाली क्षेत्र के सूरजपुर वार्ड निवासी अनिल कुमार द्विवेदी की जिला कारागार में पिटाई के बाद बीते रविवार को मौत हो गई थी। घटना के एक सप्ताह बाद सोमवार को लखनऊ से राष्ट्रीय सवर्ण परिषद के प्रांत प्रचारक सचिन तिवारी अपने कार्यकर्त्ताओं के साथ पीड़ित परिवार से मिलने उनके घर पहुंचे।उन्होंने घटना के आरोपियों की गिरफ्तारी सहित पीड़ित परिवार को 50 लाख का मुआवजा दिलाने,परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिलाने,बच्चों की शिक्षा व्यवस्था भरण पोषण और जेल में फैले भृष्टाचार पर रोक लगाने की मांग को लेकर जिलाधिकारी घनश्याम मीना को ज्ञापन सौपा। जिलाधिकारी ने तत्काल मृतक की तेरहवीं कार्यक्रम को लेकर पीड़ित को मदद देने का आश्वासन दिया है। वहीं शिवसेना के प्रदेश उपप्रमुख महात्मा रतन ब्रह्मचारी के नेतृत्व में दिए ज्ञापन में बताया कि एससीएसटी एक्ट के मामले वांछित अनिल द्विवेदी को न्यायालय में पेशी के बाद जेल भेजा गया था। जेल अधिकारी व जेल कैदिया, जेल कर्मियों आदि ने मिलकर अनिल द्विवेदी को खम्भे से बांधकर बेरहमी से मारा जिससे उसकी मौत हो गयी थी। इस घटना में जेलर और डिप्टी जेलर सहित आठ लोगों के विरुद्ध सदर कोतवाली में मुकदमा पंजीकृत किया गया है, लेकिन अभी तक किसी जेल कर्मी को हिरासत मे लेकर जेल नही भेजा गया है। उन्होंने कहा कि जेल मे गुण्डा टैक्स वसूली को लेकर इस प्रकार की घटनायें आम हो गई है। 

जेल में पैसा देने के बाद तय होता है क्वांटिटी व क्वालिटी का आहार-रतन ब्रह्मचारी

शिवसेना के प्रदेश उपप्रमुख महात्मा रतन ब्रह्मचारी ने कहा कि समस्त जेलों में जेल के अन्दर गुण्डा राज कायम है कैदी व बंदियों को मिलने वाला आहार क्वांटिटी क्वाटिटी व क्वालिटी पैसा देने पर तय किया जाता है। कहा कि जेल को सुधारगृह कहा गया है जहां सुधार की जगह अत्याचार व भ्रष्टाचार के तहत उत्पीड़न करके वहां पर जाने आने वाले बंदी व कैदियों को अपराधी बनने को मजबूर किया जाता है। जेल के अन्दर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के नियम की धज्जियां उड़ायी जा रही है। उन्होंने जेल कर्मियों व अधिकारियों की अनुपस्थिति मे जांच कमेटियों द्वारा या उच्च स्तरीय कोई भी जांच एजेन्सी से जाँच कराने की मांग की है।

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